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विजयादशमी पर डॉ. राजेश्वर सिंह का आह्वान-सनातन विरोधी और जातिवादी ताकतों को लोकतांत्रिक तरीके से परास्त करने का लें संकल्प

समग्र चेतना/ राहुल तिवारी

लखनऊ| सरोजनीनगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने विजयादशमी के अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि यह पर्व अधर्म, अन्याय और अहंकार पर धर्म तथा सत्य की विजय का प्रतीक है। आज हमें समाज को बाँटने वाली और भारत की सांस्कृतिक चेतना को कमजोर करने वाली ताकतों के विरुद्ध संकल्प लेना होगा।

डॉ. सिंह ने कहा, “आज का रावण केवल एक पुतला नहीं है। जातिवाद का रावण, समाज में वैमनस्य फैलाने वाली सोच और सनातन परंपराओं का अपमान करने वाली मानसिकता भी हमारे सामने चुनौती है। हमें ऐसी ताकतों को लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से परास्त करना होगा।”

उन्होंने कहा कि जो शक्तियाँ श्रीराम मंदिर के निर्माण का विरोध करती रहीं, अयोध्या में निहत्थे कारसेवकों पर गोली चलाने की घटना से जुड़ी रहीं, कश्मीरी हिंदुओं पर हुए अत्याचार और उनके विस्थापन पर मौन रहीं, और आज भी एक सशक्त भारत को स्वीकार नहीं कर पातीं—जनता को उनके विचारों और कार्यों का जवाब देना चाहिए।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी सांस्कृतिक जड़ों, सामाजिक एकता, राष्ट्रभक्ति और लोकतांत्रिक चेतना में निहित है। विजयादशमी हमें यही संदेश देती है कि अन्याय और विभाजनकारी विचारों के सामने चुप न रहें, बल्कि सत्य, सद्भाव और राष्ट्रहित के पक्ष में दृढ़ता से खड़े हों।
उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे जातिवाद और वैमनस्य से ऊपर उठकर सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और मजबूत भारत के निर्माण का संकल्प लें।

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