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बीबीएयू में हिंदी उत्सव का समापन, सभापति ने कहा- हिंदी राष्ट्र निर्माण की धारा है

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में एक माह से चल रहे राजभाषा हिंदी उत्सव-2026 का समापन मंगलवार को हो गया। पृथ्वी एवं पर्यावरण अध्ययन विद्यापीठ सभागार में आयोजित समापन समारोह का विषय ‘राष्ट्र निर्माण में हिंदी की भूमिका’ रहा।

समारोह की अध्यक्षता कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य अतिथि के रूप में विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह और अति विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व सांसद व पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. अशोक बाजपेई मौजूद रहे। मुख्य वक्ता बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी के प्रो. मुन्ना तिवारी रहे। स्वागत कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह ने किया।

सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत आज परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। सच्चा राष्ट्र निर्माण तब होता है जब नागरिक अपने राष्ट्र पर विश्वास करे और अपनी जड़ों से जुड़ा रहे। हिंदी केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि अनुभवों को साझा करने की व्यापक धारा है।

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत एकरूपता में नहीं, बहुरूपता में है। कश्मीर से कन्याकुमारी और कच्छ से कामरूप तक लोक परंपराएं अलग-अलग हैं, फिर भी एक सांस्कृतिक अंतर्धारा है। हिंदी ने इस अंतर्धारा को हमेशा संवाद का स्वर दिया है।

सभापति ने कहा कि हिंदी की शक्ति अन्य भारतीय भाषाओं के स्थान को कम करने में नहीं, बल्कि उनके बीच संवाद बढ़ाने में है।

हिंदी अपनी साहित्यिक परंपरा के साथ-साथ अवधी, ब्रज, भोजपुरी, बुंदेली, बघेली, राजस्थानी और पहाड़ी बोलियों से समृद्ध हुई है।
इस मौके पर हिंदी पखवाड़े में हुई प्रतियोगिताओं के विजेता छात्रों और हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संयोजन हिंदी प्रकोष्ठ के सहायक निदेशक डॉ. बलजीत कुमार श्रीवास्तव ने किया।

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