धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में अभियुक्त को 3 वर्ष की सजा, 10 हजार जुर्माना, कोर्ट के फैसले से निर्धन वर्ग में खुशी ,,

जालौन। न्यायिक व्यवस्था ने एक बार फिर साबित कर दिया कि कानून सबके लिए बराबर है और अंत में जीत सच्चाई की ही होती है। न्यायिक मजिस्ट्रेट जावेद खान की अदालत ने धोखाधड़ी के एक पुराने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
न्यायालय ने वादी पक्ष की मजबूत पैरवी और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत किए गए पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्त को दोषी करार दिया है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 के तहत अभियुक्त को 3 वर्ष के कठोर कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
क्या था पूरा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार क्रिमिनल केस संख्या 417/21 एवं मुकदमा संख्या 607/20 के अंतर्गत ग्राम जखा, थाना सिरसाकलार जिला जालौन निवासी अभियुक्त समरथ सिंह उर्फ रिंकू पुत्र जगदीश सिंह के विरुद्ध आईपीसी की धाराओं 406, 420, 467, 468, 504 और 506 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था। आरोप था कि अभियुक्त ने कूटरचित दस्तावेजों के सहारे धोखाधड़ी की थी।
अदालत में चली लंबी सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें रखीं। पत्रावलियों के अवलोकन और गवाहों के बयानों के बाद न्यायाधीश ने धारा 406, 467, 468, 504 व 506 के आरोपों से अभियुक्त को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया, लेकिन धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का आरोप सिद्ध पाया गया।
फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चा
इस न्याय के मिलने के बाद क्षेत्र में यह चर्चा आम हो गई है कि जालौन की प्रसिद्ध कहावत ‘न्याय चला निर्धन की ओर’ एक बार फिर सही साबित हुई है। फैसले से पीड़ित और कमजोर वर्ग का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है।
प्रभावी पैरवी में इनका रहा विशेष योगदान
इस न्याय प्रक्रिया को अंजाम तक पहुंचाने में अधिकारियों और अधिवक्ताओं की भूमिका सराहनीय रही। अभियोजन पक्ष से सहायक अभियोजन अधिकारी (APO) सोमवीर सिंह, महिला कांस्टेबल (पैरोकार) रेनू चौहान और हेड कांस्टेबल (कोर्ट मोहर्रिर) इन्द्र भान सिंह ने दिन-रात मेहनत कर प्रभावी पैरवी की। वहीं वादी पक्ष से अधिवक्ता दिनेश कुमार भास्कर ने मजबूत कानूनी पैरवी कर पीड़ित को न्याय दिलाने में अहम भूमिका निभाई।




