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PMFME योजना के क्रियान्वयन पर सवाल: छह माह से DRP का मानदेय लंबित, DLC में फाइलें अटकीं

अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में DRP के लंबित मानदेय का मुद्दा उठाया गया था। अधिकारियों के वेतन रोकने तक की कार्रवाई को एजेंडे में शामिल किए जाने की बात सामने आई, लेकिन इसके बावजूद DRP का भुगतान अब तक लंबित रहने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर आदेश और समीक्षा के बाद भी भुगतान क्यों नहीं हुआ?

लखनऊ:  केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME) का उद्देश्य गांवों के छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों को वित्तीय, तकनीकी और बैंक ऋण से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन उत्तर प्रदेश में योजना के क्रियान्वयन को लेकर जमीनी स्तर पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

योजना के तहत उद्यमियों को आवेदन से लेकर DPR तैयार करने, बैंक ऋण प्राप्त करने और जरूरी औपचारिकताओं में सहायता देने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी District Resource Persons (DRPs) की है। केंद्र सरकार के अनुसार DRP लाभार्थियों को DPR, बैंक ऋण, प्रशिक्षण और अन्य प्रक्रियाओं में handholding support देते हैं।

छह महीने से मानदेय का इंतजार

सूत्रों के अनुसार प्रदेश के कई DRP को पिछले लगभग छह माह से मानदेय का भुगतान नहीं हुआ है। यह स्थिति तब है जब PMFME की आधिकारिक व्यवस्था के अनुसार DRP का भुगतान संबंधित State Nodal Agency द्वारा किया जाना है। निर्धारित व्यवस्था में बैंक ऋण स्वीकृत होने के बाद DRP को प्रति लाभार्थी भुगतान का प्रावधान है।

बताया जा रहा है कि अपर मुख्य सचिव बीएल मीणा की अध्यक्षता में हुई बैठक में DRP के लंबित मानदेय का मुद्दा उठाया गया था। अधिकारियों के वेतन रोकने तक की कार्रवाई को एजेंडे में शामिल किए जाने की बात सामने आई, लेकिन इसके बावजूद DRP का भुगतान अब तक लंबित रहने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर आदेश और समीक्षा के बाद भी भुगतान क्यों नहीं हुआ?

DLC बनी उद्यमियों के लिए ‘वेटिंग रूम’?

PMFME की प्रक्रिया में DRP → DLC → Bank महत्वपूर्ण चरण हैं। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार जिला स्तर की समिति आवेदनों की सिफारिश करती है और उसके बाद मामला बैंक तक पहुंचता है।

लेकिन जमीनी स्तर पर आरोप है कि कई जिलों में DLC स्तर पर फाइलें महीनों तक लंबित रहती हैं। इससे उद्यमी बैंक तक पहुंचने से पहले ही लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया में फंस जाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आवेदन को DLC से बैंक तक भेजने की जिम्मेदारी और समयसीमा को लेकर विभागों के बीच स्पष्टता क्यों नहीं है?

उद्यान विभाग और खाद्य प्रसंस्करण विभाग के बीच जिम्मेदारी का पेच

पहले PMFME से जुड़े कार्यों को जिला उद्यान अधिकारी की निगरानी में संचालित किया जाता था। बाद में खाद्य प्रसंस्करण विभाग की भूमिका बढ़ने के साथ दोनों स्तरों पर निगरानी और जिम्मेदारियों को लेकर स्थिति बनी।

आरोप है कि फाइल आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी को लेकर दोनों विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, जिसका सीधा नुकसान उन ग्रामीण उद्यमियों को हो रहा है जो सरकारी सहायता के भरोसे अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।

केंद्र सरकार स्वयं PMFME में जिला स्तर पर नियमित समीक्षा और बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देती रही है।

सबसे गंभीर आरोप: सब्सिडी के प्रतिशत में कथित मांग

एक DRP ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि पहले जिला उद्यान अधिकारी स्तर पर फाइलों को आगे बढ़ाने में इस तरह की परेशानी नहीं थी। DRP के अनुसार, “पहले अधिकारी फाइलों को समय से आगे बढ़ा देते थे और किसी तरह की मांग नहीं होती थी। अब पहले फाइल लंबित की जाती है और बाद में पैसे की मांग किए जाने का दबाव बनाया जाता है।”

DRP ने आरोप लगाया कि कथित रूप से सब्सिडी की राशि के आधार पर 5 से 10 प्रतिशत तक की मांग किए जाने की बात सामने आ रही है।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की उद्यमिता बढ़ाने वाली योजना की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न होगा। संबंधित अधिकारियों का पक्ष लिया जाना और आरोपों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

सवाल सरकार से

PMFME के तहत केंद्र सरकार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2025 तक उत्तर प्रदेश में 17,818 ऋण स्वीकृत किए जा चुके थे।

ऐसे में सवाल यह है कि—

▪️ छह माह से DRP का मानदेय क्यों लंबित है?
▪️ जब बैठक में भुगतान को लेकर सख्त कार्रवाई का मुद्दा आया तो भुगतान क्यों नहीं हुआ?
▪️ DLC में फाइलों के निस्तारण की समयसीमा क्या है?
▪️ फाइल बैंक तक पहुंचाने की स्पष्ट जिम्मेदारी किस अधिकारी की है?
▪️ विभागों के बीच जिम्मेदारी को लेकर भ्रम क्यों है?
▪️ क्या 5–10 प्रतिशत कथित मांग के आरोपों की कोई जांच होगी?
▪️ लंबित आवेदनों और फाइलों का जिला-वार ऑडिट कब होगा?

योजना बचानी है तो सिस्टम सुधारना होगा

PMFME केवल एक सब्सिडी योजना नहीं है। यह गांवों में माइक्रो फूड प्रोसेसिंग, रोजगार और स्थानीय मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने की महत्वपूर्ण पहल है। यदि DRP को समय पर भुगतान नहीं मिलेगा, DLC में फाइलें महीनों अटकी रहेंगी और उद्यमियों को कथित अनौपचारिक मांगों का सामना करना पड़ेगा, तो योजना का उद्देश्य ही कमजोर होगा।

सरकार को चाहिए कि प्रत्येक जिले में PMFME की लंबित फाइलों, DLC में लगने वाले समय और DRP भुगतान की स्थिति का सार्वजनिक ऑडिट कराए तथा शिकायतों की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करे।

क्योंकि सवाल सिर्फ एक DRP के मानदेय का नहीं है—सवाल है कि गांव का उद्यमी सरकार की योजना तक बिना किसी रुकावट और बिना किसी अतिरिक्त बोझ के पहुंच पाएगा या नहीं।

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