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स्थानीय और राज्य स्तर पर भी किसानों की समस्याओं का समाधान हो सकता है: गौरव गुप्ता

रूरल बिज़नेस हब फॉउन्डेशन इंडिया के संयोजक गौरव कुमार गुप्ता ने किसान आंदोलन के गतिरोध को समाप्त करने के विकल्प सुझाएँ

आज किसान आन्दोलन एक राष्ट्रीय समस्या बन गया है, इस समस्या का समाधान करना और उसका विकल्प देना सरकार का, समाज का और हम सभी का दायित्व है।
केंद्रित व्यवस्था में शोषण होता है, भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है और समाज परावलम्बी हो जाता है, जिसका समाधान विकेंद्रीकरण है।
भारत विभिन्न विविधताओं का देश है हर राज्य के किसानों की समस्याएं भिन्न भिन्न है सरकार और किसान संगठनों को चाहिए की राज्य स्तर पर सरकार और समाज के साथ बैठकर इस गतिरोध का समाधान निकालना चाहिए।
भारत की सबसे छोटी इकाई गांव, ग्राम पंचायत और ग्रामीण है, जब तक हम गांव को समग्र व्यापार का केंद्र नही बनाएंगे, विश्व को बचाने का जो अभियान है, शांति का, अहिंसा का, करुणा का, शाकाहार का, प्रेम का, सद्भाव का जिससे भारत को विश्वगुरु होना है, वह संभव नही होगा।
शहर पर आधारित बड़े बड़े उद्योग, कारखाने, बड़े बड़े गोदाम, बड़े बड़े डैम को छोड़कर विकेंद्रित व्यवस्था अपनानी होगी।
किसान उत्पादक संगठन है जिसका उद्देश्य गांव के किसानों का कच्चे माल का संरक्षण कर उसकी वैल्यू एडिशन और मार्केटिंग करना है ताकि किसानों को उनकी फसल और मेहनत का सही मूल्य मिल सके। इसके लिए जन सेवा केंद्र, MSME, बैंक और ग्रामोद्योग के साथ कार्य किया जाना चाहिए। 50 % फसल का मूल्य किसानों को तत्काल देने का प्रावधान किसान उत्पादक संगठनों को है।
किसानों को समझना होगा कि केमिकल फर्टिलाइजर जीएन फ़ूड (आर्टिफिशियल), बड़े बड़े उद्योग और केंद्रित व्यवस्था के कारण गाय, गाँव और ग्रामीण परिवेश का नाश हुआ है, जिसके कारण परावलंबन बढा और जीडीपी वाली महंगी व्यवस्था ने समाज और ग्रामीण का भट्ठा बैठा दिया है।
अब स्वावलंबन के लिए देशी बीज, देशी गाय, देशी बैल, देशी जीवनशैली, देशी खानपान और देशी सोच वाली व्यवस्था को अंगीकार करना होगा।
हम किसानों को पंचायतों को समझाये की शोषण वाली व्यवस्था से पोषण वाली व्यवस्था की और जाना पड़ेगा।
केंद्र सरकार ने किसान बिल के माध्यम से जो दलालों, बिचौलिया हटाये गए है, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश सहित देश में जो आढतियों/दलालों का वर्चस्व रहा है, उसके विकल्प का धन्धा ढूंढना पड़ेगा ताकि हम शोषण से पोषण की ओर जा सकें।
पिछले कई दशकों से दुनियां का जो ढांचा रहा है, बड़े बड़े बैंक, कारखाने और ग्रांट, वह शोषण पर आधारित है।
अब समय है व्यक्ति को अपना आत्मसम्मान (अपो दीपों भव:), आत्मनिर्भर, लोकल आदि शब्दों को कम्प्यूटर के युग में समझना पड़ेगा।

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