पद बदले, जिम्मेदारियां बदली पर नहीं बदला काम करने का अंदाज

अपनी सादगी और मानवीय व्यवहार के साथ अपराध और अपराधियों के प्रति सख्त रुख के लिए अलग पहचान रखते हैं डीजी अग्निशमन सुजीत कुमार पाण्डेय
समग्र चेतना/ राहुल तिवारी
लखनऊ। अपनी सादगी और मानवीय व्यवहार के साथ ही अपराध और अपराधियों के सख्त रुख के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुजीत कुमार पाण्डेय के पास पद कोई भी भी हो पर वे अपनी कार्यकुशलता से हमेशा चर्चा में रहते हैं। ऐसा ही कुछ नजारा उनके कार्यालय में उस वक्त देखने को मिला जब दूरदराज से आये फरियादियों को उन्होंने प्राथमिकता से सुना और उनकी समस्या का निराकरण भी किया।
वर्तमान में पुलिस महानिदेशक अग्निशमन का दायित्व संभाल रहे आईपीएस सुजीत कुमार पाण्डेय के स्वभाव से हर कोई वाकिफ हैं जिन्होंने हमेशा अपनी बेहद ईमानदारी और कर्मठता के साथ विभाग की सेवा की है।
दिन मंगलवार समय अपराह्न 2 बजे…..
साहब ने अपने स्टाफ से पूछा कोई मिलना तो नहीं चाहता, उन्हें लाना। एक बेटी अपने पिता जसपाल सिंह को व्हील चेयर से लेकर डीजी साहब के कमरे में प्रवेश किया।
सुजीत पांडे: क्या हुआ बेटा:
बेटी: सर मेरे पिताजी व्हील चेयर पर है और रामपुर से समय खत्म हो गया है उनका स्थानांतरण लखनऊ हुआ है ये अकेले इतनी दूर इनकी देख रेख करने वाला कोई नहीं है कृपया इनका स्थान्तरण निरस्त कर दीजिए।
डीजी साहब: हो जायेगा बेटा। समस्या भी जटिल थी लेकिन ऐसे अफसर जिनकी वाकई में जितनी तारीफ की जाये कम है।
इसके बाद ओम प्रकाश सिंह जो आगरा में तैनात है जो पूरी तरह से पैरालिसिस से पीड़ित है जो अपने परिवार के साथ आए थे, उन्होंने अपना स्थानांतरण फिरोजाबाद करवाने का आग्रह किया। हमेशा परेशानी में क्यों न उनका स्टाफ हो छोटा हो या बड़ा लेकिन उनका नजरिया हमेशा सबके लिए एक सा ही रहता है।
आईपीएस सुजीत कुमार पाण्डेय ने अपने सरल स्वभाव मृदभाषी सौम्यता से अपनी अलग पहचान बनाई है। डीजी अग्निशमन सुजीत पांडे का यह कोई आज का ही नहीं बल्कि रोज की दिनचर्या है। जनता हो या उनका स्वयं का स्टाफ सभी की परेशानी सुनकर समस्या का निस्तारण उनकी प्राथमिकता में रहता है।
एक एसएफओ ने बताया मैंने ट्रांसफर की ऐसी लिस्ट जो बिल्कुल साफ थी जिसमें न कोई भेदभाव था न जातिवाद पहली बार देखा शायद। उस ट्रांसफर लिस्ट में ऐसे कर्मचारी थे जो अपने जिलों के फायर स्टेशन में 7 साल से 18 साल से तैनात थे जिनको हटाना मुश्किल था उनको भी हटाने का काम किया गया ऐसी निष्पक्षता शायद ही किसी अधिकारी में देखने को मिलती है।




