ऋषि का सद्साहित्य न्याय व्यवस्था के पथ पर चलने की शक्ति प्रदान करता है: उमानन्द शर्मा

गायत्री ज्ञान मंदिर का ज्ञान यज्ञ अभियान, उच्च न्यायालय, लखनऊ खण्डपीठ के पुस्तकालय में हुई 471वें युगऋषि वाङ्मय की स्थापना
समग्र चेतना/ राहुल तिवारी
लखनऊ। गायत्री ज्ञान मंदिर इंदिरा नगर, लखनऊ के विचार क्रान्ति ज्ञान यज्ञ अभियान के अन्तर्गत न्यायमूर्तिगण पुस्तकालय, उच्च न्यायालय, लखनऊ खण्डपीठ में गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित सम्पूर्ण 79 खण्डों का 471वें ऋषि वाङ्मय की स्थापना का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। बी. पी. सविता ने अपने सम्मानित पूर्वजों की स्मृति में ज्ञानदान के रुप में उपरोक्त पुस्तकालय में यह सम्पूर्ण युगऋषि वाङ्मय साहित्य भेंट किया साथ-साथ उपस्थित लोगों को अखण्ड ज्योति (हिन्दी) पत्रिका भेंट की गयी तथा मुख्य प्रलेखीकरण अधिकारी-सह-मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष हेमन्त शुक्ला एवं उनके समीक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह को अमृतवाणी कैलेण्डर भेंट किया गया।
इस अवसर पर वाङ्मय स्थापना अभियान के मुख्य संयोजक उमानंद शर्मा ने कहा कि ऋषि का सद्साहित्य न्याय व्यवस्था के पथ पर चलने की शक्ति प्रदान करता है। बी. पी. सविता ने भी अपने विचार रखे। मुख्य प्रलेखीकरण अधिकारी-सह-मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष हेमन्त शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
वाङ्मय साहित्य स्थापना के इस अवसर पर गायत्री ज्ञान मंदिर के प्रतिनिधि उमानंद शर्मा, बी.पी. सविता, सावित्री शर्मा, सरस्वती सिंह एवं न्यायमूर्तिगण पुस्तकालय के मुख्य प्रलेखीकरण अधिकारी-सह-मुख्य पुस्तकालयाध्यक्ष हेमन्त शुक्ला, समीक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह, समीक्षा अधिकारी सुदीप्त श्रीवास्तव, समीक्षा अधिकारी नीलेश पटेल, समीक्षा अधिकारी हेमन्त कुमार, सेक्शन आफिसर श्वेता श्रीवास्तव, सेक्शन आफिसर प्रीति मिश्रा इत्यादि मौजूद रहे।



