टीले में तब्दील होता बिजली पासी के पिता का किला

लखनऊ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इर्दगिर्द राजाओं के किले बने हुए थे, जिनका समुचित रखरखाव न होने के कारण ढह कर टीले में तब्दील हो गये । ऐसा एक किला महाराजा बिजली पासी का है जिसका सरकारों ने जीर्णोद्वार कराकर व बाऊँड्रीवाल से आच्छादित कराकर सुरक्षित कर दिये जाने से उसकी रौनक पुनः लौट आयी है।
अनुसूचित जाति व जनजाति मोर्चा अवध प्रान्त के क्षेत्रीय कार्यसमिति सदस्य सुभाष पासी ने गुरुवार को लोकभवन मुख्यमंत्री कार्यालय में नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए मा० मुख्यमंत्री से महाराजा बिजली पासी के पिता महाराजा नथावन का टीला आसपास के क्षेत्र में जो नटवाडीह के नाम से जाना व पहचाना जाता है।

उक्त टीला औरंगाबाद- बिजनौर मार्ग पर 14.03 एकड़ भूमि के क्षेत्रफल में ऊँचाई से फैला हुआ है। जिसे खनन व भू-माफिया टीले का अस्तित्व ध्वस्त कर रहें हैं। टीले की भूमि को सुरक्षा हेतु महाराजा नथावन की प्रतिमा स्थापित करने, इसके जीर्णोद्वार एवं सौन्दर्यीकरण कराये जाने की माँग रखी है। ‘
इसी क्रम में सई नदी पर गोड़वा-हुलास खेड़ा के मध्य रपटा पुल बनने से क्षेत्र के 14 गाँवो की जनता को 10 किमी० की दूरी कम हो जाने एवं रहीमनगर पड़ियाना के मजरा ककौहा नहर की पुलिया से महजनामऊ उन्नाव सीमा तक डामरीकरण कराये जाने का प्रस्तावित पत्र मुख्यमंत्री जी को सौंपा, जिस पर मुख्यमंत्री जी ने प्राथमिकता के आधार पर उपर्युक्त तीनों कार्यो को कराये जाने का आश्वासन दिया है।




