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जीवन को गढ़ना

प्रदीप छाजेड
प्रदीप छाजेड

विद्यार्थी के सामने लक्ष्य पढ़ाई का हैं । वह जीवन में शिक्षा प्राप्त करना आवश्यक हैं परन्तु पढ़ाई के साथ – साथ अपने जीवन को गढ़ना भी बहुत महत्वपूर्ण हैं । अगर इंसान ठान ले कि मुझे अमुक मुक़ाम हाशिल करना है ,तो ध्यान रहे कि अथाह सकारात्मक परिश्रम कभी-कभी भाग्य की रेखा भी बदल देते हैं। हां ! परिश्रम के दो फ़ायदे हैं। हम अगर शारीरिक परिश्रम करते हैं तो हमारा स्वास्थ्य सही रहेगा और अगर दिमाग़ का श्रम करते है तो हम्हें उस क्षेत्र में और आगे बढ़ने का मौक़ा मिलेगा। हम परिवार में कैसे रहें, कैसे सामंजस्य रहें, कैसे एक – दूसरे को सहन करें ? इस प्रकार की शिक्षा और संस्कार भी जीवन में आने चाहिए ।

समझशक्ति बढ़ गईं और सहन शक्ति नहीं बढ़ी तो समझना चाहिए एक बड़ी कमी रह गई । मन की सुंदर सोच है तो हमको सारा संसार सुंदर नज़र आएगा । ज़िंदगी में कभी भी अपने किसी हुनर पर हम घमंड ना करे क्योंकि पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वज़न से डूब जाता हैं । आचार्य श्री तुलसी पाली में विराजमान थे । उस समय आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी युवाचार्य अवस्था में थे ।कोलकाता के नोपानी स्कूल के प्रमुख लोग आए, वार्तालाप हुआ । युवाचार्य श्री महाप्रज्ञ जी – आपका नोपानी स्कूल बहुत अच्छा हैं ।

आप अच्छी पढ़ाईं कराते हैं और फिर बच्चों को दुःखी बनने के लिए घर भेज देते हैं । आगन्तुक लोगों ने आश्चर्य के साथ पूछा- यह कैसे ? युवाचार्य श्री – आप बच्चों की समझशक्ति को तो बढ़ा देते हैं पर साथ में सहनशक्ति अगर नहीं बढ़ती हैं तो वे घर- परिवार में जाएंगे, अनेक बातों को देखेंगे । वे बातों को समझ तो लेंगे किन्तु सहन नहीं कर सकेंगे और दुःखी बन जाएंगे । आगन्तुक लोग – आपकी यह बात ठीक हैं, ऐसा तो होता हैं । युवाचार्य श्री – हम यही कह रहें हैं कि समझशक्ति के साथ सहनशक्ति भी बढ़नी चाहिए ।

परिवार में सहिष्णुता हों, एक – दूसरे के प्रति हितैषिता हो और अनुशासन हो तो परिवार का माहौल अच्छा बनता हैं । हम देखते है कि जिस तरह लोहे को आग में तपाकर चोट मार-मार कर आकार दिया जाता है और वह मजबूत हो जाता है, वैसे ही हमारा मन भी कठिनाइयों से गुजर कर जीवन की चुनौतियों का दृढ़ता से सामना कर-कर मजबूत बनता जाता है। अत: हमको  जीवन में आने वाली चुनौतियों से घबराकर भागने की बजाय उनका दृढ़ निश्चय से सामना करना सीखना चाहिए। उन्हें पार कर हमारे दृष्टिकोण में शुभ भविष्य देखना चाहिए।आहिस्ते-आहिस्ते यह अभ्यास जीवन को खास बनाएगा। हम याद रखें कि मन की मजबूती ही सफल जीवन की आधारशिला होती है ।

जीवन में सफलता के लिए आत्मविश्वास उतना ही आवश्यक है, जितना मानव के लिए ऑक्सीजन तथा मछली के लिए पानी, बिना आत्मविश्वास के व्यक्ति सफलता की डगर पर कदम बढ़ा ही नहीं सकता हैं । आत्मविश्वास वह ऊर्जा है जो सफलता की राह में आने वाली अड़चनों, कठिनाइयों एवं परेशानियों आदि से मुकाबला करने के लिए व्यक्ति को साहस प्रदान करती है |  वर्तमान समय में अगर हमें कुछ पाना है, किसी भी क्षेत्र में कुछ करके दिखाना है, जीवन को खुशी से जीना है, तो इन सबके लिए आत्मविश्वास का होना परम आवश्यक है | आत्मविश्वास में वह शक्ति है जिसके माध्यम से हम कुछ भी कर सकते है | आत्मविश्वास से हमारी संकल्प शक्ति बढ़ती है और संकल्प शक्ति से हमारी आत्मिक शक्ति बढ़ती है | 

अतः  मधुमक्खी कण-कण से ही शहद इकट्ठा करती है, उसे कहीं से इसका भंडार नहीं मिलता। उसके छत्ते में भरा शहद उसके आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम का ही परिणाम है। हम इंसान ऐसे है जब कुर्सी मिलती है सत्ता मिलती है राज-पाट मिलता है आदि – आदि तो ख़ुद के सामने किसी को भी कुछ नही समझते । हम तानाशाही बरतते हैं । पर कहते है ना कि हर पूनम बाद अमावस है । हर उजाले बाद अंधेरा आदि – आदि । उसी प्रकार समय एक सा नही रहता हैं, हम आज अगर कामयाबी के शिखर पर है तो अपनी बात कहने का ख़ूबसूरत अन्दाज़ रखे ताकि जवाब भी ख़ूबसूरत सुन सके । हमारी सरलता-सादगी-समता- सामंजस्यता ही हमें हमेशा जीवंत बनाए रखेगी। मर्यादित जीवन का जब अंत होगा, तब इस लोक की कोई भी वस्तु साथ नही जाएगी ।

यह बात भी हम जानते हैं की उम्र की दहलीज पर जब सांझ की आहट होती हैं तब ख्वाहिशें थमने लगती हैं । और सुकून की तलाश बढ़ जाती हैं वह सुकून हमें भौतिक धन के साथ-साथ आध्यात्मिक संपती ही देगा। भारत एक  अध्यात्म प्रधान देश है। जो भौतिक संसाधनों के साथ  आत्म हित के सामंजस्य की शिक्षा भी देता हैं । जीवन वह नहीं है जो हम जन्म से पाते हैं। वास्तविक जीवन वह है जो हम जन्म के बाद से बनाते हैं । अतः जीवन होगा वैसा ही जैसा हम बना पाते हैं।

तनावरहित आनंदित जीवन सफलता का संजीवन है। पर यह तभी सम्भव है जब मनोभाव, चिन्तन और तन सामंजस्यपूर्वक एक दिशा में मन नियन्त्रित कर काम करें । जीवन की कला वही जानता है  जो परिस्थितियों के साथ हर समय, हर कहीं सही से सामंजस्य रख पाता है । हम मस्तिष्क से सकारात्मक व रचनात्मक सोचें और सदा आशावादी वह भावनात्मक रहें जिससे जीवन को हम सही से गढ़ सकें ।

प्रदीप छाजेड़ (बोरावड़ )
पता – प्रदीप छाजेड,छाजेड़ सदन, गणेश डूँगरी गेट के पास, सबलपुर रोड़, जिला – डीडवाना- कुचामन, राज्य – राजस्थान, पोस्ट – बोरावड़, पिन -341502
नम्बर -9993876631

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