कॉलेज समिति के ‘भस्मासुरों’ का हुआ अंत, 570 बीघे सरकारी जमीन डकारने वाले गुरु-घंटालों पर गिरेगी FIR की गाज

रामनाथ रावत
सीतापुर। शिक्षा के मंदिर को ही प्रापर्टी डीलिंग का अड्डा बनाने वाले आधुनिक ‘भस्मासुरों’ का आखिरकार अंत हो ही गया। उत्तर प्रदेश शासन ने एक इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य कारुणेश कुमार शुक्ल और प्रबंधक कमल कुमार जैन की जुगलबंदी पर ऐसा हंटर चलाया है कि उनके भ्रष्टाचार के सारे सुर-ताल बिगड़ गए हैं। इन दोनों पर छात्रों से अवैध वसूली करने, फर्जी तबादले करने और विद्यालय की 570 बीघे से अधिक सरकारी जमीन को अवैध रूप से बेचने के गंभीर आरोप सिद्ध हुए हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन ने ‘इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921’ के तहत कॉलेज की प्रबंध समिति को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने हाईवे पर स्थित विद्यालय की करोड़ों रुपये मूल्य की 570 बीघे से अधिक सरकारी जमीन को बिना किसी सक्षम अनुमति के आवासीय प्लॉट में बदल दिया और उसे अवैध रूप से बेच दिया। इस खेल की शुरुआत वर्ष 2003 में ही हो गई थी, जब पूर्व सेक्रेटरी तोताराम जैन ने नियमों को ताक पर रखकर खुद के नाम ही जमीन का दान पत्र लिखवा लिया था। इसके अलावा विद्यालय में फर्जी तबादलों का खेल भी धड़ल्ले से चल रहा था। प्रधानाचार्य और प्रबंधक की मिलीभगत से कॉलेज के छात्रों का भी जमकर आर्थिक शोषण किया गया।
छात्रों से पीटीए, जनरेटर और कल्चरल शुल्क के नाम पर नियम विरुद्ध तरीके से भारी अवैध वसूली की जा रही थी। इस महाघोटाले को लेकर शासन ने बीते 16 अप्रैल 2026 को प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। तय समय सीमा में प्रबंधन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब न मिलने पर शासन ने यह सख्त कदम उठाया है। शासन के आदेशानुसार, इंटर कॉलेज की सभी चल-अचल संपत्तियों को तत्काल प्रभाव से जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को सौंप दिया गया है। अब विद्यालय का संचालन और संपत्तियों की देखरेख DIOS की निगरानी में होगी। इसके साथ ही शासन ने दोषी प्रधानाचार्य कारुणेश कुमार शुक्ल, प्रबंधक कमल कुमार जैन और अन्य सह-आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।




