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देशी गाय और आधुनिक तकनीक से किसानों की आमदनी दो गुनी करने की गारण्टी देता एग्री स्टार्टअप

लखीमपुर खीरी: 2004 में केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स का गठन किया था. इस आयोग ने पांच रिपोर्टें सौंपी थी, जिसमें प्रमुख सिफारिश
१. कृषि को राज्यों की सूची के बजाय समवर्ती सूची में शामिल करने की है, जिससे केंद्र व राज्य दोनों किसानों की मदद के लिए आगे आएं और समन्वय बनाया जा सके, वैसे यह सिफारिश आज भी लंबित है २. फ़सल उत्पादन क़ीमत से 50% ज़्यादा दाम किसानों को मिले ३. किसानों को कम दामों में क्वालिटी बीज मुहैया कराए जाएं ४. गांवों में विलेज नॉलेज सेंटर या ज्ञान चौपाल बनाया जाए ५. महिला किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड मिले ६. किसानों को प्राकृतिक आपदाओं की स्थिति में मदद मिले ७. सरप्लस और इस्तेमाल नहीं हो रही ज़मीन के टुकड़ों का वितरण किया जाए ८. खेतिहर जमीन और वनभूमि को गैर-कृषि उद्देश्यों के लिए कॉरपोरेट को न दिया जाए ९. फसल बीमा की सुविधा पूरे देश में हर फसल के लिए मिले १०. खेती के लिए कर्ज की व्यवस्था हर गरीब और जरूरतमंद तक पहुंचे ११. सरकारी मदद से किसानों को मिलने वाले कर्ज की ब्याज दर कम करके 4% की जाए।
केंद्र सरकार और राज्य सरकार लगातार किसानों की समस्याओं का समाधान करने और एमएस स्वामीनाथन रिपोर्ट को लागू करने का प्रयास कर रही है। किसानों को सरकारी मदद से 4% पर केसीसी ऋण उपलब्ध है जिसका लाभ सीमांत किसान और लघु सीमांत किसान आसानी से उठा रहे है। फसल बीमा की सुविधा में और सुधार लाने की जरूरत है जिसके लिए सरकार को और सघनता से कार्य करने की जरूरत है। प्राकृतिक आपदाओं की स्थितियां और मौसम की सटीक जानकारी इसरो के सैटेलाइट लॉन्च करने के बाद मोबाइल एप्प के माध्यम से आसानी से उपलब्ध हैं। पुरुष किसानों के साथ साथ महिला किसानों को आसानी से ऋण उपलब्ध हैं जिससे किसानों को दलालों के साथ साथ सूदखोरों से छुटकारा मिलता हैं। सोशल मीडिया पर सरकार, सरकारी कृषि प्रशिक्षण संस्थानों, कृषि संगठनों और तमाम मीडिया चैनलों के माध्यम से पारंपरिक और आधुनिक तकनीक आम किसानों तक पहुंच रही हैं। सरकार सस्ते दामों पर बीज भी उपलब्ध करा रही है लेकिन सरकारी तंत्र की असंवेदनशीलता, लूटतंत्र की सक्रियता और आम किसानों में जनभागीदारी की कमी के कारण समस्याओं में कमी नही आ रही हैं।
किसान आंदोलन में अपनी MSP की मांग को लेकर अड़े किसानों को एक बार आत्म अवलोकन करने की जरूरत है, यदि किसान महंगे रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का इस्तेमाल बंद कर आधुनिक तकनीक और जैविक खेती किसानी की और बढ़े तो वह आसानी से फसल लागत को दो से तीन गुना आमदनी कर सकता है। आज देश में जैविक खेती को लेकर अभियान चल रहा है, बडी संख्या में किसान इस अभियान से जुड़ रहे है, सरकार भी जैविक किसानों को प्रोत्साहित कर रही है। योजना आयोग के पूर्व सलाहकार सेवानिवृत्त आईएएस डॉ कमल टावरी, उत्तर प्रदेश शासन में मुख्य सचिव रहे डॉ बृजेश शुक्ला, छत्तीसगढ़ से पूर्व सांसद प्रदीप गांधी, नीदरलैंड से एनआरआई डॉ पुष्पिता अवस्थी की प्रेरणा और मार्गदर्शन में युवा उद्यमी इं० गौरव कुमार गुप्ता ने किसानों को गौ आधारित जैविक खेती और नवीन तकनीकी एवं किसान उत्पाद आधारित उद्यम लगाने के लिए सलाहकार सेवा से एकल खिड़की सुविधा मुहैया कराने के लिए स्टार्टअप शुरू किया है जो किसानों, युवाओं और महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए कार्य कर रहा है। रूरल बिज़नेस हब फाउंडेशन इंडिया किसानों के खराब और अक्षम बाजार नेटवर्क को मजबूत करने, कमजोर ढांचागत सेटअप में सुधार करने, असंगठित कृषि पद्धतियां और बिखरी हुई कृषि भूमि बड़ी संख्या में बिचौलियों का हस्तक्षेप को कम करने के साथ साथ कम्प्यूटर के माध्यम से पारदर्शिता लाने, किसानों को सरकारी संस्थाओ से जोड़कर किसानी मानकीकरण और ग्रेडिंग प्रणाली का अभाव को कम करने, सरकारी योजनाओं के माध्यम से खराब भंडारण सुविधाओं में सुधार लाने के लिए कंसल्टेंट के रूप में कार्य कर रहा है। इस अभियान से जुड़ने के लिए ईमेल ruralbusinesshub.org@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते है।

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