मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का जाल, आमजन की गाढ़ी कमाई दांव पर

मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का जाल, आमजन की गाढ़ी कमाई दांव पर
(मोहनलालगंज तहसील के मोहनलालगंज,गोसाईगंज,निगोहां,सिसेंडी,नगराम समेत पूरे क्षेत्र में अवैध प्लाटिंग का बिछा जाल, सस्ते प्लाट के लालच में लुट रही आम जनता
एलडीए व जिला पंचायत से बिना नक्शा पास कराए धड़ल्ले से हो रही प्लाटिंग, बुलडोजर चलने पर उजड़ रहे लोगों के सपने
राहुल तिवारी/ समग्र चेतना
लखनऊ।मोहनलालगंज तहसील के अंतर्गत आने वाले मोहनलालगंज, गोसाईगंज, नगराम, सिसेंडी और निगोहां क्षेत्रों में इन दिनों अवैध प्लाटिंग का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। बिना एलडीए (लखनऊ विकास प्राधिकरण) और जिला पंचायत से नक्शा पास कराए सैकड़ों बीघा जमीन पर धड़ल्ले से प्लाट काटे जा रहे हैं। कम पैसों में प्लाट दिलाने का सपना दिखाकर बिल्डर और तथाकथित रियल एस्टेट कारोबारी आम लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।
कम दाम का लालच, फिर ठगी का खेल….
ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में रहने वाले मध्यम वर्ग और मजदूर तबके के लोग जीवन भर की जमा पूंजी जोड़कर अपने आशियाने का सपना देखते हैं। इसी सपने का फायदा उठाकर प्लाटिंग करने वाले लोग “सस्ता प्लाट”, “तुरंत रजिस्ट्री”, “कोई दिक्कत नहीं आएगी” जैसे लुभावने वादे करते हैं। शुरुआत में सब कुछ आसान दिखाया जाता है, लेकिन प्लाट खरीदने के बाद सच्चाई सामने आती है कि न तो एलडीए से नक्शा पास है और न ही जिला पंचायत से कोई वैधानिक अनुमति ली गई है।
बुलडोजर की कार्रवाई से उजड़ते सपने…..
जब प्रशासन की नजर अवैध प्लाटिंग पर पड़ती है तो कार्रवाई तय मानी जाती है। ऐसे में कई जगहों पर बुलडोजर चल जाता है, सड़कें, नालियां और चिन्हित प्लाट ध्वस्त कर दिए जाते हैं। इस कार्रवाई का सबसे बड़ा खामियाजा उन लोगों को भुगतना पड़ता है जिन्होंने अपनी खून-पसीने की कमाई लगाकर प्लाट खरीदा होता है। न पैसा वापस मिलता है, न ही जमीन सुरक्षित रहती है।
बिल्डर गायब, खरीदार परेशान….
कार्रवाई के बाद अक्सर देखा गया है कि प्लाट बेचने वाले बिल्डर या दलाल मौके से गायब हो जाते हैं। उनके मोबाइल बंद हो जाते हैं और दफ्तरों पर ताले लटक जाते हैं। पीड़ित लोग दर-दर भटकने को मजबूर हो जाते हैं—कभी थाने, कभी तहसील और कभी विकास प्राधिकरण के चक्कर लगाते रहते हैं, लेकिन समाधान नहीं मिल पाता।
प्रशासनिक निगरानी पर सवाल….
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध प्लाटिंग खुलेआम सड़क किनारे बोर्ड लगाकर की जा रही है, इसके बावजूद समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं होती। जब प्लाट बिक जाते हैं और निर्माण शुरू हो जाता है, तब जाकर कार्रवाई होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर जिम्मेदार विभाग पहले क्यों नहीं जागते? क्या बिना किसी जानकारी के इतनी बड़ी संख्या में प्लाटिंग संभव है?
कानूनी जानकारी के अभाव में लोग बन रहे शिकार…..
विशेषज्ञों का कहना है कि प्लाट खरीदने से पहले यह देखना बेहद जरूरी है कि जमीन का ले-आउट एलडीए या जिला पंचायत से स्वीकृत है या नहीं। रजिस्ट्री से पहले नक्शा पास होना, भूमि उपयोग परिवर्तन (लैंड यूज) और विकास अनुमति जैसे दस्तावेजों की जांच अनिवार्य है। जानकारी के अभाव में लोग दलालों की बातों में आकर जीवनभर की पूंजी गंवा बैठते हैं।
जिम्मेदारी तय होनी चाहिए…..
मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र में फैलती अवैध प्लाटिंग केवल कानून व्यवस्था का ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का भी गंभीर सवाल है। यदि समय रहते सख्ती बरती जाए, अवैध प्लाटिंग करने वालों पर मुकदमे दर्ज हों और खरीदारों को जागरूक किया जाए, तो सैकड़ों परिवारों को ठगी से बचाया जा सकता है।
जरूरत है कि प्रशासन पहले ही चरण में अवैध प्लाटिंग को चिन्हित कर उसे रोके, साथ ही दोषी बिल्डरों व दलालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करे। तभी आमजन का भरोसा बचेगा और मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र को अवैध प्लाटिंग के जाल से मुक्ति मिल सकेगी।




