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जानें सुपरफूड के बारे में, क्यों बढ़ रही है इनकी विदेशों में माँग?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में उल्लेख किया कि 2023 को "बाजरा के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष" के रूप में मनाया जाता है। आपको याद होगा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है।

नीदरलैंड: पोषण सिर्फ महंगी दवाओं और भोज्य पदार्थों में नहीं मिलता, यह हमारे घर की रसोई में पाए जाने वाले सामान्य खाद्य पदार्थों, मसालों और आसपास मिलने वाली जड़ी-बूटियों, सब्जियों, फलों में भी पाया जाता है.
आजकल की युवा पीढ़ी स्वस्थ रहने और खाने पर ज्यादा ध्यान दे रही है। अगर आप इसे इस तरह से देखें तो भी बाजरा में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स होते हैं। कई लोग इसे सुपरफूड भी कहते हैं। सुपर फूड से आशय उन खाद्य सामग्रियों से है जिनमें पोषक तत्व अपेक्षाकृत रूप से ज़्यादा होते हैं. मिलेट्स को भी ऐसी ही फसलों में गिना जाता है. अगर आप देश के किसी भी हिस्से में जाएंगे तो वहां के लोगों के खाने में आपको अलग-अलग तरह के बाजरा जरूर मिलेंगे। बाजरा में भी हमारी संस्कृति की तरह ही काफी विविधता पाई जाती है। ज्वार, बाजरा, रागी, सावन, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी, कुट्टू, ये सब सिर्फ बाजरा है। ये आठ फसलें आती हैं. है। वास्तव में, फसल बहुत कम समय में तैयार हो जाती है, और इसके लिए ज्यादा पानी की भी आवश्यकता नहीं होती है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में उल्लेख किया कि 2023 को “बाजरा के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष” के रूप में मनाया जाता है। आपको याद होगा कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष घोषित करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। आपको यह जानकर भी बहुत खुशी होगी कि भारत के इस प्रस्ताव को 70 से अधिक देशों ने स्वीकार कर लिया था। है। दोस्तों जब मैं मोटे अनाज की बात करता हूं, तो मैं आज अपना एक प्रयास आपके साथ साझा करना चाहता हूं। पिछले कुछ समय से जब कोई विदेशी मेहमान भारत आता है, जब राष्ट्राध्यक्ष भारत आते हैं, तो मेरा प्रयास होता है कि भोजों में भारत के बाजरे यानि हमारे मोटे अनाज से बने व्यंजन मिलें। और अनुभव यह रहा है कि इन गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें बहुत पसंद किया है और वे हमारे मोटे अनाज के बारे में, बाजरा के बारे में बहुत सारी जानकारी एकत्र करने का प्रयास भी करते हैं। मोटे अनाज, मोटे अनाज, प्राचीन काल से हमारी कृषि, संस्कृति और सभ्यता का हिस्सा रहे हैं।‘’

पोषक तत्त्वों से भरपूर : कुपोषण के ख़िलाफ़ अहम हथियार
बीते कई दशकों के संघर्ष के बावजूद भारत में कुपोषण अभी भी एक बड़ी समस्या बना हुआ है. पीएम मोदी ने अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कहा है कि कुपोषण से लड़ने में भी मिलेट्स काफी लाभदायक हैं, क्योंकि ये प्रोटीन के साथ-साथ एनर्जी से भी भरे होते हैं
इन फसलों में गेहूं और चावल की तुलना में सॉल्युबल फाइबर ज़्यादा होता है.
इनमें मैक्रो और माइक्रो पोषक तत्वों का बहुत अच्छा मिश्रण होता है. मैक्रो पोषक तत्व प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट फैट होते हैं. और माइक्रो पोषक तत्व विटामिन और मिनरल्स होते हैं. एक ग़रीब खा व्यक्तिएगा तो उसे कुपोषण से बचाव मिलेगा और एक समृद्ध व्यक्ति खाएगा तो उसे पोषक तत्व मिलेंगे.
पीएम ने कहा, “सिर्फ एक ही नहीं, बाजरा के कई फायदे हैं। ये मोटापा कम करने के साथ-साथ डायबिटीज, हाइपरटेंशन और दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को भी कम करते हैं। इसके साथ ही ये पेट और लीवर की बीमारियों को रोकने में भी मददगार होते हैं। हमने अभी कुछ समय पहले कुपोषण का जिक्र किया था। बाजरा कुपोषण से लड़ने में भी बहुत फायदेमंद होता है, क्योंकि ये ऊर्जा के साथ-साथ प्रोटीन से भी भरपूर होते हैं।“
फिंगर मिलेट (रागी) में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है. प्रति 100 ग्राम फिंगर मिलेट में 364 मिलिग्राम तक कैल्शियम होता है. यही नहीं, इनमें आयरन की मात्रा भी गेहूं और चावल की अपेक्षा ज़्यादा होती है.

जलवायु परिवर्तन से लड़ने में सक्षम
जलवायु परिवर्तन की वजह से दुनिया भर में बारिश के समय और प्रकृति में परिवर्तन देखे जा रहे हैं. इस वजह से कहीं बारिश ज़्यादा हो रही है तो कहीं सूखा पड़ रहा है.
यही नहीं, भारत के कई राज्य भूगर्भीय जल संकट से जूझ रहे है. ऐसी चुनौतियों के बीच मिलेट्स क्रॉप एक समाधान की तरह नज़र आती हैं. गेहूं और चावल की तुलना में मिलेट्स क्रॉप में पानी की खपत काफ़ी कम होती है.
उदाहरण के लिए, गन्ने के एक पौधे को अपने पूरे जीवनकाल में 2100 मिलीमीटर पानी की ज़रूरत होती है. वहीं, मिलेट्स क्रॉप जैसे बाजरा के एक पौधे को पूरे जीवनकाल में 350 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है. फिंगर मिलेट में भी 350 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है. इसी तरह ज्वार को 400 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है.”
हमारे छोटे किसानों के लिए बाजरा विशेष रूप से फायदेमंद है। बाजरा घास भी सबसे अच्छा चारा माना जाता है।

अर्थव्यस्था के लिए फायदेमंद

बाजरा का उल्लेख हमारे वेदों में मिलता है और इसी प्रकार पुराणनुरु और तोलकाप्पियम में भी इनका उल्लेख मिलता है। भारत विश्व में बाजरा का सबसे बड़ा उत्पादक है; इसलिए इस पहल को सफल बनाने की जिम्मेदारी भी हम भारतीयों के कंधों पर है।
आज देश में बाजरा को बढ़ावा देने के लिए बहुत कुछ किया जा रहा है। इससे संबंधित अनुसंधान और नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ एफपीओ को प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि उत्पादन बढ़ाया जा आज कई ऐसे स्टार्ट-अप उभर रहे हैं, जो बाजरा पर काम कर रहे हैं। इनमें से कुछ बाजरे की कुकीज बना रहे हैं तो कुछ मिलेट पैनकेक और डोसा भी बना रहे हैं. कुछ ऐसे भी हैं जो मिलेट एनर्जी बार्स और मिलेट ब्रेकफास्ट बना रहे हैं। इस फेस्टिव सीजन में हम ज्यादातर व्यंजनों में बाजरा का भी इस्तेमाल करते हैं। आप अपने घरों में बने ऐसे व्यंजनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जरूर शेयर करें, जिससे लोगों में बाजरा के बारे में जागरूकता बढ़ाने में मदद मिले।

लेखक मंगलेश्वर श्रीवास्तव जौनपुर, उत्तर प्रदेश से हैं। वर्तमान समय मैं चिप डिज़ाइन में वरिष्ठ वैज्ञानिक है। मंगलेश्वर जी ने इंजीनियरिंग की डिग्री भारत देश से हासिल की है और इनका स्नाकोत्तर जर्मनी से पूर्ण हुई है, जहाँ इन्होने वैज्ञानिक उपलब्धियों निमित्त नीदरलैंड्स देश को चुना और यही सक्रिय है।

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