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जैविक आहार हैं फोर्टिफाइड चावल का विकल्प: इं० गौरव कुमार

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जैविक खेती किसानी के प्रोत्साहन हेतु लिखा गया पत्र

लखीमपुर खीरी: 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुपोषण के खिलाफ अभियान के तहत फोर्टीफाइड चावल का वितरण ग्रामीण स्तर पर राशन की दुकान, प्राथमिक पाठशाला में बच्चों को मिड-डे और 2024 सरकार की सभी योजनाओं में फोर्टीफाइड चावल वितरण का निर्णय लिया है।

रुरल बिजनेस हब फाउंडेशन इडिया के राष्ट्रीय संयोजक गौरव कुमार गुप्ता ने जैविक उर्वरकों से तैयार चावल को फोर्टिफाइड का विकल्प सुझाया हैं। श्री गौरव गुप्ता के अनुसार वर्तमान में अधिकतर रासायनिक उर्वरकों के माध्यम से खेती की जा रही है, जिसके कारण किसानी उत्पाद की गुणवत्ता में काफी कमी आयी है जिसको सरकार मिनिरल्स के साथ ब्लेंड करके फोर्टिफाइड चावल बनाने और पोषक तत्वों का आहार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, यह तात्कालिक समाधान तो हो सकता है लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए देशी गाय आधारित जैविक खेती ही एक मात्र विकल्प हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जैविक खेती के प्रोत्साहन हेतु आवश्यक कदम उठाने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार हमारा कृषि आधारित अर्थव्यवस्था का देश कृषि के क्षेत्र में तकनीकी विकास कर रहा है, किसानों के लिए खेती करना आसान हो रहा है। उच्च स्तरीय तकनीक से हमारी उत्पादक क्षमता तो बढ़ी लेकिन उत्पादों की गुणवत्ता कम हो रही है जिसका मुख्य कारण रासायनिक उर्वरकों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना हैं। आंकड़ों के अनुसार कृषि आधारित अर्थव्यवस्था वाले हमारे देश की लगभग 70% आबादी को 50% से कम पोषक तत्वों का आहार उपलब्ध होता हैं। इसका मुख्य कारण रासायनिक उर्वरक (विष) युक्त आहार है। प्रधानमंत्री ने लालकिले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हुए कुपोषण के खिलाफ अभियान में फोर्टिफाइड चावल को हथियार बनाने का निर्णय लिया हैं। श्री गुप्ता कहा कि कुपोषण सहित हज़ारों बीमारियों का इलाज, रासायनिक उर्वरकों का विकल्प और देश के किसानों की समृद्धि का आधार जैविक खेती किसानी और जैविक उत्पाद हैं। भारतीय जैविक तकनीकी और जैविक उत्पाद वैश्विक जरूरतों को पूरा करने के में सक्षम है। इस दिशा में डॉ० कमल टावरी, पूर्व सचिव भारत सरकार की प्रेरणा से रूरल बिजनेस हब फाउंडेशन इंडिया ने राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया हैं, जिसकी एक परियोजना ( लखीमपुर खीरी की महिलाओं के समूह द्वारा केला के रेशे का हस्तकला क्षेत्र में उपयोग) को प्रधानमंत्री ने 25 जुलाई को मन की बात में कही हैं।
जैविक खेती किसानी से होने वाले लाभ
१. रासायनिक उर्वरकों के आयात से होने वाले आर्थिक खर्च/अनुदान में कमी
२. कुपोषण और बीमारियों पर होने वाला खर्च में कमी
३. देश में पशुओं की समस्याओं का समाधान
४. वैश्विक जैविक जरुरतों को पूरा करने पर विदेशी मुद्रा का भंडार बढ़ेगा
५. जैविक आहार से लोगों की मानसिकता में सुधार होगा, अपराध कम होने के साथ साथ कार्यक्षमता बढ़ेगी।
६. भारत स्वस्थ, समृद्ध और अपराध मुक्त की ओर अग्रसर होगा।
गौरव कुमार गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से जैविक खेती के प्रोत्साहन और वैश्विक स्तर पर विपणन हेतु आवश्यक कदम उठाने का आवाहन किया हैं।

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