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वरिष्ठ नागरिकों के लिए रेल किराए में रियायत बहाल करने की मांग

श्रीराम जनसेवा कल्याण समिति ने रेल मंत्री को भेजा पत्र, तीर्थाटन, इलाज और परिजनों से मिलने में सुविधा का दिया हवाला

लखनऊ। वरिष्ठ नागरिकों को कोविड-19 से पूर्व मिल रही रेल किराया रियायत को पुनः बहाल करने की मांग को लेकर श्रीराम जनसेवा कल्याण समिति ने रेल मंत्री को पत्र भेजा है। समिति के अध्यक्ष निर्मल कुमार बाजपेई ने यह जानकारी देते हुए कहा कि कोविड-19 के दौरान परिस्थितियों को देखते हुए वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रेल किराया रियायत को स्थगित किया जाना उचित था, लेकिन महामारी समाप्त होने के बाद भी इस सुविधा को पूर्ववत बहाल नहीं किया गया है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

समिति की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि कोविड से पहले भारतीय रेल में 58 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को 50 प्रतिशत तथा 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुषों को 40 प्रतिशत तक की रेल किराया रियायत मिलती थी। कोविड-19 के दौरान इसे बंद कर दिया गया, लेकिन अब तक इसकी बहाली नहीं हुई है।

निर्मल कुमार बाजपेई ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों और वर्तमान सरकार द्वारा भी वरिष्ठ नागरिकों के हित में अनेक सुविधाएं दी जाती रही हैं। संविधान में कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना की गई है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों को पहले से मिल रही सुविधा को स्थायी रूप से समाप्त रखना उनके हितों के संरक्षण की भावना के अनुरूप नहीं है।

तीर्थाटन और पर्यटन में मिलेगी राहत

समिति का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद अधिकांश वरिष्ठ नागरिकों की इच्छा देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के दर्शन करने की होती है। सनातन परंपरा में तीर्थाटन का विशेष महत्व है, लेकिन बढ़ती महंगाई और सीमित आय के कारण अनेक बुजुर्ग रेल यात्रा का खर्च वहन नहीं कर पाते। रेल किराए में रियायत बहाल होने से उन्हें तीर्थाटन और पर्यटन के अपने सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी।

दूर-दराज के शहरों में रहने वाले बेटे-बेटियों, भाई-बहनों और अन्य रिश्तेदारों से मिलने के लिए भी वरिष्ठ नागरिकों को रेल यात्रा करनी पड़ती है। किराया अधिक होने के कारण कई बुजुर्ग अपने परिजनों से मिलने जाने में भी असमर्थ हो जाते हैं।

विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श में भी होगी सुविधा

समिति ने पत्र में वरिष्ठ नागरिकों की चिकित्सा संबंधी जरूरतों का भी उल्लेख किया है। उम्र बढ़ने के साथ विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे बुजुर्गों को कई बार अपने शहर से बाहर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेना पड़ता है। रेल किराए में रियायत न मिलने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ नागरिक दूसरे शहरों में बेहतर चिकित्सा परामर्श लेने से बचते हैं।

समिति का तर्क है कि सभी वरिष्ठ नागरिक नियमित रूप से रेल यात्रा नहीं करते हैं। ऐसे में रियायत बहाल करने से सरकार पर अत्यधिक आर्थिक भार नहीं पड़ेगा, जबकि इसका लाभ जरूरतमंद बुजुर्गों को मिल सकेगा।

जनप्रतिनिधियों की सुविधाओं का भी दिया हवाला

पत्र में यह भी कहा गया है कि जनप्रतिनिधियों के वेतन, भत्तों और यात्रा संबंधी सुविधाओं में समय-समय पर वृद्धि की जाती रही है। वहीं देश के वरिष्ठ नागरिकों को पहले से प्राप्त रेल किराया रियायत अभी तक वापस नहीं मिली है।

समिति के अध्यक्ष निर्मल कुमार बाजपेई ने कहा कि सरकार विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं पर बड़ी धनराशि खर्च कर रही है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों को पहले से मिल रही रेल यात्रा रियायत बहाल करना उनके प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और सामाजिक दायित्व का परिचायक होगा।

वरिष्ठ नागरिकों ने लगाई सहानुभूतिपूर्वक विचार की गुहार

समिति ने रेल मंत्री से मांग की है कि वरिष्ठ नागरिकों के व्यापक हित में कोविड-19 से पूर्व दी जा रही रेल किराया रियायत को पुनः बहाल किया जाए, ताकि वे अपने शेष जीवन में तीर्थाटन, पर्यटन, बेहतर चिकित्सा परामर्श और दूर रह रहे परिजनों से सुगम आवागमन कर सकें।

निर्मल कुमार बाजपेई ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को पूर्ववत रेल किराया रियायत देना उनके साथ नैसर्गिक न्याय होगा और इससे कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना भी मजबूत होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार वरिष्ठ नागरिकों की इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए रियायत बहाल करने की दिशा में सकारात्मक निर्णय लेगी।

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