लखनऊ

स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा को क्यों मिली बड़ी हार !

अवनीश सिंह से दूर हो गए मतदाता?
84 हजार वोटों की गिनती में विपक्ष को 38,757, भाजपा के अवनीश सिंह को 26,506 मत मिले; क्यों भाजपा के भीतरघात से लेकर कमजोर जनसंपर्क तक पर उठने लगे सवाल

समग्र चेतना/ राहुल तिवारी
लखनऊ। स्नातक विधान परिषद सीट पर भाजपा की हार में पार्टी की चुनावी रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक करीब 84 हजार मतों की गिनती में विपक्ष को लगभग 38,757 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा प्रत्याशी अवनीश सिंह को 26,506 मत प्राप्त हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार विपक्ष, करीब 12,251 वोटों से आगे चल रहा हैं। इस बढ़त ने भाजपा के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारी में चिंता बढ़ा दी है और राजनीतिक गलियारों में हार-जीत के संभावित कारणों पर चर्चा तेज हो गई है।

क्या भाजपा का प्रत्याशी संगठन मतदाताओं तक पहुंचने में नाकाम रहा?
चुनाव के हार ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा किया है कि मजबूत संगठन और सत्ता में होने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी को अपेक्षित समर्थन क्यों नहीं मिल रहा है? क्या अवनीश सिंह मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत नहीं कर पाए? क्या चुनाव से पहले स्नातक मतदाताओं से पर्याप्त संपर्क नहीं किया गया? या फिर पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी नतीजों पर असर डाल रही है?

राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह भी विचारणीय है कि क्या भाजपा के भीतर किसी स्तर पर नाराजगी है हालांकि, अभी उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर इसकी पुष्टि के लिए संगठन की सक्रियता, क्षेत्रवार मतदान और कार्यकर्ताओं की भूमिका का आकलन जरूरी होगा।

दूसरी ओर, यह सवाल भी अहम है कि क्या स्नातक मतदाता प्रत्याशी की उपलब्धता, व्यक्तिगत संपर्क और अपनी अपेक्षाओं को अधिक महत्व दे रहे हैं। विधान परिषद का स्नातक निर्वाचन सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है, इसलिए यहां मतदाताओं के मुद्दों और मतदान के रुझान का अलग से विश्लेषण करना होता है भाजपा संगठन को यह समीक्षा करनी होगी कि कमी प्रत्याशी के जनसंपर्क में रही, चुनाव प्रबंधन में या स्थानीय स्तर पर या फिर कार्यकर्ताओं की सक्रियता में या मतदाताओं की नाराजगी में।

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