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डीजी अग्निशमन के हटते ही फायर विभाग में शुरू हो गया भ्रष्टाचार का खुला खेल

डीजी का चार्ज देख रहीं एडीजी ने भ्रष्टों को मुख्यालय में बैकडोर से दी तैनाती, एक रिटायर्ड अधिकारी भी काम में लगाया गया, पूर्व डीजी और मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार के निर्देशों की उड़ाई जा रही हैं धज्जियाँ

समग्र चेतना/ राहुल तिवारी

लखनऊ। पूर्व डीजी फायर के पद पर नियुक्त रहे आईपीएस सुजीत पाण्डेय के केंद्र सरकार में प्रतिनियुक्ति पर चले जाने के बाद डीजी फायर का पद खाली चल रहा हैँ।

फायर विभाग के सभी कार्य वर्तमान में एडीजी फायर मुख्यालय पदमजा चौहान के आदेशानुसार किए जा रहे हैँ।एडीजी द्वारा फायर विभाग की नियमावली की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। कई अधिकारी कर्मचारियों का ट्रांसफर व मुख्यालय अटैच किए हैँ व कुछ कर्मचारियों को ससपेंड व स्पष्टीकरण भी मांगा है। जबकि फायर नियमावली के अनुसार प्रशासनिक फेरबदल केवल डीजी फायर कर सकते हैँ।

डीजी फायर पद पर कार्यरत रहे सुजीत पाण्डेय द्वारा जिन भ्रष्ट अधिकारीयों को मुख्यालय से हटाया था उनके चले जाने के बाद एडीजी द्वारा उन्हें बैक डोर से एंट्री देकर वापस मुख्यालय में बुला लिया हैँ यही नहीं रिटायर्ड गोपनीय सहायक मोहम्मद अली को को भीं बैक डोर से एंट्री मिली हैँ। स्टेनो को भीं ससपेंड किया गया हैँ। सूत्र बताते हैँ कि एडीजी पदमजा चौहान द्वारा उन अधिकारीयों व कर्मचारियों पर विशेष रुप से कार्यवाही की जा रही हैँ जिनको सुजीत पाण्डेय ने नियुक्त किया था।

गाज़ियाबाद में नियुक्त एक अधिकारी जिनके लिए अवनीश अवस्थी ने भीं पत्र लिखा था कि उनको प्राइम लोकेशन पर ना भेजा जाये उनको एडीजी द्वारा नहीं हटाया गया। नॉएडा व गाज़ियाबाद में काफ़ी वर्षो से जमे सीएफओ को आज तक नहीं हटाया गया हैँ। ऐसा प्रतीत होता हैँ एडीजी कुछ लोगो पर मेहरबान हैँ और कुछ लोगो को दंड मिल रहा हैँ।

सूत्र तो यह भीं बताते हैँ कि यह सब एक सीएफओ अधिकारी की मंशा के अनुरूप हो रहा हैँ जिनकी नियुक्ति किसी जिले मै सीएफओ के रूप मे हैँ लेकिन हफ्ते में तीन दिन मुख्यालय रहकर अपने अनुसार प्रशासनिक कार्य कराते हैँ। फायर विभाग में चल रहे हैँ इस खेल से प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि को धूमिल किया जा रहा हैँ।

विभाग में व्यक्ति विशेष को भी टारगेट किया जा रहा है जिससे अधिकारी व कर्मचारी मानसिक रूप से परेशान है। एडीजी द्वारा पूर्व में किए गए डीजी फायर के आदेश को भीं दरकिनार कर दिया गया हैँ। ऐसे में फायर विभाग में डीजी पद पर नियुक्ति शासन को जल्द से जल्द करनी चाहिए जिससे कर्मचारियों के हित का शोषण ना हो पाए और सभी कार्य सरकार पूर्ण क्षमता के साथ करें और ऐसे अधिकारियों पर शासन को जल्द से जल्द कार्यवाही करके हटाया जाये जिससे प्रदेश के मुखिया जोकि भ्रष्टाचार मुक्त उत्तरप्रदेश बनाने का दावा कर रहे हैँ उनकी छवि धूमिल हो रही है।

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