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सिंगापुर के निवेशकों को यूपी में दिखी अपार संभावनाएं, जेवर के पास ‘सिंगापुर सिटी’ बसाने का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ की उच्चस्तरीय बैठक

लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में निवेश की तैयारी

‘एमओयू से मैन्युफैक्चरिंग’ और ‘ग्राउंड ब्रेकिंग से प्रोडक्शन’ तक निवेशकों को हरसंभव सहयोग देगी प्रदेश सरकार

लखनऊ, 28 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख ग्रोथ इंजन बनाने और एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को राजधानी लखनऊ में सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन के नेतृत्व में आए 14 सदस्यीय उच्चस्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक में उत्तर प्रदेश में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक विकास और भारत-सिंगापुर आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश में लॉजिस्टिक्स, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर, ग्रीन एनर्जी, अर्बन प्लानिंग और हॉस्पिटैलिटी सहित कई रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े निवेश की इच्छा व्यक्त की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगापुर की आधुनिक तकनीक, वैश्विक अनुभव और उत्तर प्रदेश की विशाल बाजार क्षमता, कुशल मानव संसाधन तथा मजबूत औद्योगिक आधार मिलकर विकास की नई इबारत लिख सकते हैं। राज्य सरकार निवेश प्रस्तावों को केवल समझौतों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें धरातल पर उतारने और उत्पादन शुरू कराने के लिए प्रतिबद्ध है।

‘सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड’ से निवेशकों को भरोसा

मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक सिंगापुर के निर्माता स्वर्गीय ली कुआन यू के विजन ने दुनिया को दिखाया कि किसी देश की वैश्विक पहचान उसके भौगोलिक आकार से अधिक उसकी दूरदर्शिता, कार्यक्षमता और संसाधनों के कुशल उपयोग से बनती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हुए वैश्विक स्तर पर नई पहचान बनाई है। इसी तरह, उत्तर प्रदेश ने भी अपनी पुरानी ‘बीमारू’ छवि से बाहर निकलकर देश के प्रमुख आर्थिक विकास केंद्र के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जीडीपी, वार्षिक बजट और प्रति व्यक्ति आय में तीन गुना वृद्धि हुई है। कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी भी तीन गुना बढ़ी है। उन्होंने कहा कि बिना जनता पर कोई नया कर लगाए उत्तर प्रदेश का राजस्व अधिशेष राज्य बने रहना प्रदेश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।

फरवरी 2026 में अपनी सिंगापुर यात्रा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वहां राष्ट्रपति थर्मन षणमुगरत्नम और प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के साथ हुई मुलाकातों के दौरान लगभग 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश समझौतों पर सहमति बनी थी। सिंगापुर रोड शो में निवेशकों को ‘सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड’ का जो भरोसा दिया गया था, राज्य सरकार आज भी उसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता अब निवेश प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलना है। ‘एमओयू से मैन्युफैक्चरिंग’ और ‘ग्राउंड ब्रेकिंग से प्रोडक्शन’ तक प्रत्येक चरण में निवेशकों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।

जेवर के पास ‘सिंगापुर सिटी’ विकसित करने का प्रस्ताव

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल के सामने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निकट एक समर्पित ‘सिंगापुर सिटी’ और हाईटेक इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए उत्तर भारत का प्रमुख सप्लाई चेन और औद्योगिक केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के संगम तथा विश्वस्तरीय एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ाव इस क्षेत्र को लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण बनाता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में औद्योगिक निवेश के लिए 75 हजार एकड़ से अधिक का लैंड बैंक उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त, 27 इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।

उन्होंने यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए कहा कि लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट में स्थापित छह रणनीतिक नोड्स को 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। यह प्रदेश में औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन की व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है।

वैश्विक कंपनियों के साथ निवेश साझेदारी को बढ़ावा

बैठक के दौरान प्रदेश में नए निवेश को गति देने के लिए वैश्विक कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण कंपनी एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल और सतत अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में कार्यरत ब्लू प्लैनेट एनवायरनमेंटल सॉल्यूशंस के साथ एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। इसके साथ ही मेसर्स ग्रेटर नासिक इन्फ्राकॉन प्राइवेट लिमिटेड को पात्रता प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।

इन पहलों को प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार, आधुनिक तकनीक के उपयोग और सतत विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा अपशिष्ट प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में वैश्विक कंपनियों की भागीदारी से नई तकनीकों और निवेश के अवसरों को बढ़ावा मिल सकता है।

छह प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर जोर

मुख्यमंत्री ने भारत-सिंगापुर साझेदारी को ठोस परिणामों तक पहुंचाने के लिए छह प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया। बैठक में निवेश की संभावनाओं, औद्योगिक आधारभूत संरचना, आधुनिक तकनीक और परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में निवेशकों के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण, बेहतर कनेक्टिविटी, पर्याप्त भूमि और विशाल उपभोक्ता बाजार उपलब्ध है। राज्य सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को परियोजनाओं की स्थापना से लेकर उत्पादन शुरू होने तक किसी अनावश्यक बाधा का सामना न करना पड़े।

सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा मुख्यमंत्री की फरवरी 2026 की सिंगापुर यात्रा के बाद दोनों पक्षों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग की महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे प्रदेश में विदेशी निवेश की नई संभावनाओं को बल मिलने और उत्तर प्रदेश को वैश्विक विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स तथा आधुनिक तकनीक के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।

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