बरवर में पेड़ों की कटान पर डीएफओ सख्त, बोले—जांच के बाद होगी निष्पक्ष कार्रवाई

करीब 100 पेड़ काटे जाने और 72 पेड़ों की निकासी की चर्चा के बीच वायरल वीडियो की उच्चस्तरीय जांच; जीपीएस फोटो और खसरा लेकर होगी कार्यवाही
गोपाल तिवारी
प्रभारी समग्र चेतना न्यूज एजेंसी
लखीमपुर-खीरी – मोहम्मदी के बरवर क्षेत्र में आम सहित फलदार पेड़ों की कटान को लेकर उठ रहे सवालों के बीच दक्षिणी खीरी के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया है। क्षेत्र में करीब 100 पेड़ काटे जाने, 72 पेड़ों की निकासी और आगे 200 से 250 पेड़ों की कटान की तैयारी की चर्चाओं के बीच वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
डीएफओ ने बताया कि मोहम्मदी के बरवर क्षेत्र में आम के पेड़ काटे जाने की सूचना मिली थी। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो की उच्चस्तरीय जांच कराई जा रही है और इसकी निगरानी वह स्वयं कर रहे हैं। संबंधित वन क्षेत्राधिकारी को मौके पर जाकर रिपोर्ट देने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और कार्रवाई निष्पक्ष रूप से नियमानुसार होगी।
डीएफओ ने आमजन से अपील की कि जहां भी पेड़ों की कटान की सूचना मिले, वहां की जीपीएस लोकेशन वाली फोटो सहयोग के रूप में उपलब्ध कराएं, ताकि संबंधित स्थल की पहचान कर समय रहते कार्रवाई की जा सके। उन्होंने बताया कि मामले में खसरा सहित राजस्व अभिलेख भी मंगवाए जाएंगे, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि पेड़ निजी कृषि भूमि पर हैं या सरकारी भूमि पर और उनकी वास्तविक स्थिति क्या है।
डीएफओ ने शासन के आदेश का हवाला देते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश में 29 प्रमुख वृक्ष प्रजातियों की कटान के संबंध में विशेष प्रतिबंध और अनुमति की व्यवस्था है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ काटने के लिए नियमानुसार ऑनलाइन आवेदन और सक्षम विभाग की अनुमति आवश्यक है। आवेदन मिलने पर वन विभाग निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच कर अपनी आख्या देगा और नियमानुसार निर्णय लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि आम की कलमी और देशी प्रजाति की पहचान भी मामले में महत्वपूर्ण है। वायरल वीडियो देखकर कुछ पेड़ कलमी आम के प्रतीत हो रहे हैं, लेकिन केवल वीडियो के आधार पर उनकी प्रजाति और कटान की वैधता के बारे में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए मौके का निरीक्षण, राजस्व अभिलेख और अन्य जरूरी तथ्यों की जांच की जाएगा
निजी और सरकारी भूमि के नियमों में अंतर
डीएफओ के अनुसार, निजी कृषि भूमि पर वृक्षों की कटान के मामलों में प्रजाति, पेड़ की स्थिति, व्यास और लागू शासनादेश की शर्तों को ध्यान में रखकर निर्णय किया जाता है। विकास कार्य की आवश्यकता, पेड़ का रोगग्रस्त या सूखना, फल देने की क्षमता में कमी तथा निर्धारित व्यास जैसी परिस्थितियां संबंधित नियमों के अंतर्गत विचारणीय हो सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि पर पेड़ों को लेकर निजी भूमि जैसी छूट नहीं मानी जा सकती। ऐसे मामलों में संबंधित विभाग द्वारा मूल्यांकन और अभिलेखों के आधार पर निर्णय किया जाता है।
डीएफओ ने कहा कि वन विभाग स्वयं भी वृक्षारोपण करता है और अन्य विभागों के माध्यम से कलमी आम, अमरूद सहित विभिन्न फलदार प्रजातियों के पौधे लगवाए जाते हैं। उन्होंने शारदानगर में पूर्व में की गई कार्रवाई का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां नियमों के अनुसार कार्रवाई कर एक लाख 16 हजार रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया था।
फिलहाल बरवर में पेड़ों की वास्तविक संख्या, उनकी प्रजाति, कटान की अनुमति और निकासी से संबंधित अभिलेखों की जांच का इंतजार है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कटान नियमों के अनुरूप हुआ है या किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी की गई है।




