रसूखदारों की आवभगत और ग्रामीणों चक्कर पे चक्कर!

हरौनी कस्बे में स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबन्धक और कर्मचारियों का व्यवहार है बेहद खराब
समग्र चेतना/ राहुल तिवारी
लखनऊ। बन्थरा के हरौनी कस्बे में स्थित यूनियन बैंक ऑफ इंडिया जो हरौनी कस्बे में सबसे पुरानी बैंक मानी जाती है इस यूनियन बैंक को खुले लगभग 35 साल बीत चुके हैं। हरौनी में मात्र एक बैंक का सहारा लेकिन यहां उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। रामदासपुर गांव निवासी काफी पुराने इस बैंक के उपभोक्ता राम प्रकाश ने बताया कि बैंक में कोई भी कर्मचारी काम नहीं करता है सिर्फ लोगों को दौड़ाया जाता है। उन्होंने कहा 2024 से उनकी पास बुक नहीं चढ़ी है बैंक में कहा भी लेकिन किसी ने नहीं सुना। राम प्रकाश ने बताया किताब चढ़ाने वाली मशीन भी काफी दिनों से बंद पड़ी है।

सोमवार को जब वो केवाईसी करवाने आए तो उन्हें वापस लौटना पड़ा। उन्होंने कहा वो तीन दिन से लौट रहे हैं और आज बताया गया कि आज नेटवर्क नही आ रहा है। वहीं क्षेत्रीय रसूखदार लोगों को शाखा प्रबंधक के चैम्बर में बैठाल कर चाय पानी करवाया जाता है और वहीं से काम भी करवा दिया जाता है। गरीब जनता को बैक कर्मचारियों की मनमानी के चलते परेशानी का सामना करना पड़ता है। इससे पहले भी क्षेत्र के तमाम लोग यूनियन बैंक ऑफ इंडिया हरौनी शाखा के कर्मचारियों की शिकायत विभाग के जिम्मेदारों से कर चुके हैं लेकिन बैंक में सुधार होने का कोई नाम ही नहीं ले रहा है।




