मंडी व्यापारियों के लिए नई उम्मीद: कृषि प्रसंस्करण से बदलेगी तस्वीर
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की 172वीं बैठक में लिया गया निर्णय मंडी व्यापारियों के लिए नई आशा लेकर आया है। मंडी परिसरों में PPP मॉडल के अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना

लेख: गौरव कुमार गुप्ता
उत्तर प्रदेश सहित देशभर की कृषि मंडियाँ आज एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के दौर से गुजर रही हैं। वर्षों तक किसान और उपभोक्ता के बीच सबसे मजबूत कड़ी रहे गल्ला व्यापारी अब बदलते कृषि व्यापार मॉडल के कारण नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
पिछले एक दशक में केंद्र और राज्य सरकारों ने किसानों को सशक्त बनाने के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। कम ब्याज पर किसान फसल ऋण, किसान उत्पादक संगठन (FPO) का गठन, कृषि अवसंरचना में निवेश, कृषि यंत्रीकरण और गाँवों में खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन जैसी योजनाओं ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है। इन पहलों से किसानों और ग्रामीण उद्यमिता को निश्चित रूप से लाभ मिला है।
हालाँकि, इस बदलाव का दूसरा पक्ष भी सामने आया। बड़ी संख्या में FPO, सीधे खरीद मॉडल और गाँवों में स्थापित हो रहे प्रसंस्करण उद्योगों के कारण पारंपरिक गल्ला मंडी व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हुआ। अनेक मंडियों में व्यापार पहले की तुलना में धीमा पड़ा और वर्षों से स्थापित व्यापारिक व्यवस्था परिवर्तन के दौर में पहुँच गई। यह स्थिति केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अधिकांश राज्यों में देखने को मिल रही है।
ऐसे समय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की 172वीं बैठक में लिया गया निर्णय मंडी व्यापारियों के लिए नई आशा लेकर आया है। मंडी परिसरों में PPP मॉडल के अंतर्गत कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने तथा इसकी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के निर्देश इस दिशा में एक दूरदर्शी पहल माने जा सकते हैं।
यदि इस नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो मंडी व्यापारी केवल अनाज की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं रहेंगे। वे आटा, दाल, तेल, मसाले, पशु आहार, रेडी-टू-कुक और अन्य कृषि उत्पादों के प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से भी जुड़ सकेंगे। इससे उनके लिए आय के नए स्रोत विकसित होंगे और मंडियाँ केवल व्यापारिक केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण औद्योगिक एवं मूल्य संवर्धन केंद्र बन सकेंगी।
वर्ष 2025 में आयोजित Rural Empowerment Summit के दौरान Rural Hub ने भी सरकार के समक्ष यही विचार रखा था कि मंडियों को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप Rural Industrial Hub के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही Rural Economy, Bio Economy और PPP आधारित Rural PSU मॉडल के माध्यम से कृषि प्रसंस्करण, स्थानीय रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का सुझाव दिया गया था। आज सरकार द्वारा कृषि प्रसंस्करण और PPP मॉडल पर दिया जा रहा विशेष बल इस दिशा में सकारात्मक संकेत देता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि मंडी व्यापारी इस परिवर्तन को केवल चुनौती के रूप में न देखें, बल्कि इसे अपने व्यवसाय के विस्तार का अवसर मानें। यदि सरकार आसान अनुमोदन प्रक्रिया, सुलभ वित्त, आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बाज़ार उपलब्ध कराती है, तो वर्षों से मंदी का सामना कर रहे लाखों व्यापारियों के लिए यह एक नए युग की शुरुआत साबित हो सकती है।
भारत की कृषि अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और प्रसंस्करण का है। किसान, व्यापारी, FPO, उद्योग और सरकार यदि एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो उत्तर प्रदेश न केवल ग्रामीण औद्योगिकीकरण का मॉडल बनेगा, बल्कि विकसित भारत की मजबूत आर्थिक नींव भी रखेगा।




