भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लेखपाल पर फिर उठे सवाल, कानूनगो के संरक्षण का भी आरोप

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लेखपाल पर फिर उठे सवाल, कानूनगो के संरक्षण का भी आरोप
समग्र चेतना/ राहुल तिवारी
सरोजनी नगर। सरोजनी नगर तहसील में तैनात लेखपाल बिंदेश कुमार रावत को लेकर एक बार फिर भ्रष्टाचार और प्रॉपर्टी कारोबारियों से कथित सांठगांठ के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि बिंदेश कुमार रावत क्षेत्र के कुछ प्रॉपर्टी डीलरों के साथ मिलकर किसानों की जमीनों के क्रय-विक्रय से जुड़े मामलों में प्रभाव डालते हैं। यह भी आरोप है कि स्थानीय निवासी होने का लाभ उठाकर वह लंबे समय से भूमि संबंधी मामलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
सूत्रों का यह भी दावा है कि तहसील के कानूनगो समर बहादुर सिंह का उन्हें संरक्षण प्राप्त है। आरोप है कि भूमि संबंधी विभिन्न प्रक्रियाओं, जैसे धारा-24, पैमाइश, मेड़बंदी तथा अन्य राजस्व कार्यों में कथित रूप से प्रॉपर्टी कारोबारियों को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे किसानों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

गौरतलब है कि लगभग दो वर्ष पूर्व उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान (एंटी करप्शन) की टीम ने लेखपाल बिंदेश कुमार रावत को कथित रूप से ₹10,000 रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। आरोप था कि वह एक किसान से ग्राम समाज की भूमि की पैमाइश कराने के बदले रिश्वत मांग रहे थे। किसान की शिकायत पर सतर्कता अधिष्ठान ने जाल बिछाया और गौरी-बिजनौर रोड स्थित अमर मिलन मैरिज लॉन के पास कार्रवाई करते हुए लेखपाल को हिरासत में लिया था। इसके बाद उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा गया था।
अब स्थानीय लोगों का आरोप है कि जमानत पर रिहा होने के बाद भी लेखपाल की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया है। उनका कहना है कि वह पुनः उसी क्षेत्र में रहते हुए भूमि संबंधी मामलों में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं और कथित रूप से अवैध कमाई का सिलसिला जारी है। किसानों का आरोप है कि इससे निष्पक्ष राजस्व प्रशासन प्रभावित हो रहा है।
इन आरोपों के संबंध में लेखपाल बिंदेश कुमार रावत और कानूनगो समर बहादुर सिंह का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।




