बड़ी जिम्मेदारी की खुशी तो दूर जाने का गम

छोटे बड़े अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ आम जनता ने भावुक मन से दी अपने प्रिय अफसर को विदाई
डीजी अग्निशमन से निदेशक नेशनल पुलिस अकादमी के पद पर स्थानांतरित होने पर आईपीएस सुजीत कुमार पाण्डेय को विदाई और बधाई देने वालों का पुलिस मुख्यालय में लगा ताता
समग्र चेतना/ राहुल तिवारी
लखनऊ। अच्छा चलता हूं दुआंओ में याद रखना, मेरे जिक्र का जुवां पर सुआद रखना। शायद यह वह भावुक करने वाले पल थे जब वरिष्ठ आईपीएस सुजीत पांडे की लोग विदाई और शुभकामनाएं देने पुलिस मुख्यालय पहुंचे। वरिष्ठ आईपीएस सुजीत पांडे जिनका नौकरी का वो सफर जो लोगों के दिलों में बस गया। वो स्नेह वो प्रेम और मृदभाषी सौम्यता का प्रतीक बन गया।
शायद यही वजह रही कि भारत की सबसे बड़ी पुलिस अकादमी सरदार वल्लभ भाई पटेल जानें पर उनके मिलने वालों का पुलिस मुख्यालय में हुजूम उमड़ पड़ा। हैदराबाद जाने पर लोग उनको विदाई और शुभकामनाएं देने पहुंचे जहां एक ओर लोगों को अपने प्रिय अधिकारी को सबसे बड़ी पुलिस अकादमी जानें का गर्व था वहीं दूसरी ओर लोगों को सुजीत पांडे का दूर जाना रास नहीं आ रहा था। ये वो अफसर है जिन्होंने चाहें जनता का आदमी हो या विभाग का छोटा कर्मचारी हो या अर्दली सभी को सामान भाव से एक नजर से देखा और सबसे अहम बात यह है कि एक ईमानदार अफसर की छवि की ख्याति प्राप्त की।
इस आईपीएस अफसर ने कभी धन तो नहीं कमाया लेकिन लोगों के दिलों में राज करने के साथ सरकार की मंशा पर हमेशा खरा उतरने का काम किया। पुलिस मुख्यालय में सिर्फ लोगों की जुबान से एक ही धुन गूंज रही थी साहब बहुत नेक इंसान हैं। हर कर्मचारी हर सिपाही यहां तक चाय पानी पिलाने वाला अर्दली भी अपने आंसूओं को रोक नहीं पाया। ऐसे हैं आईपीएस सुजीत पांडे लखनऊ की जनता जिन्हें एक ईमानदार अफसर का दर्जा देने से जरा सा भी नहीं कतराती हैं।
शायद वास्तविकता भी यही है जिनके ऊपर आज तक कार्यकाल में कोई भी दाग नहीं लगा और ईमानदार अफसर के रूप में अपनी पहचान को बनाया।




