उत्तर प्रदेशलखनऊ

जालौन में माइनर सफाई में जेसीबी से धांधली, मजदूरों के हक पर डाका, नियमों की उड़ी धज्जियां

जालौन।* जनपद जालौन में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के स्पष्ट शासनादेशों और तकनीकी मानकों को ताक पर रखकर माइनरों की सिल्ट सफाई में बड़े पैमाने पर वित्तीय एवं प्रक्रियात्मक अनियमितता का मामला सामने आया है।

शासन के वार्षिक सिल्ट सफाई दिशा-निर्देशों के अनुसार छोटी माइनरों व वितरिकाओं की तली से गाद निकालने का कार्य अनिवार्य रूप से मानव श्रम अर्थात अकुशल श्रमिकों से कराया जाना चाहिए, ताकि माइनर का प्राकृतिक तल स्तर और ढलान सुरक्षित रहे तथा स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिल सके। इसके विपरीत मलकपुरा माइनर में अधिकारियों की देखरेख में ठेकेदार द्वारा खुलेआम जेसीबी मशीन से केवल ऊपरी मिट्टी हटाकर खानापूर्ति की जा रही है।

जब स्थानीय ग्रामीणों व मजदूरों ने मौके पर पहुंचकर तय मानकों के उल्लंघन और रोजगार छीने जाने पर आपत्ति जताई तो आरोप है कि ठेकेदार ने मनमानी दिखाते हुए कार्य इसी प्रकार कराने की बात कही और विरोध करने पर ग्रामीणों को धमकाया। ग्रामीणों का कहना है कि जेसीबी के अनियंत्रित उपयोग से माइनर का तल स्तर असंतुलित हो जाएगा और अंतिम छोर पर स्थित खेतों तक सिंचाई का पानी कभी नहीं पहुंच सकेगा, जिससे रबी फसलों को भारी नुकसान होगा।

*वित्तीय व विभागीय नियमों का उल्लंघन*
विभागीय नियमों के तहत सिल्ट सफाई का भुगतान वित्तीय हस्तपुस्तिका खंड-6 के पैरा 367 व 368 के तहत माप पुस्तिका में दर्ज वास्तविक मानव दिवसों और तल स्तर की तकनीकी पैमाइश के आधार पर देय होता है। मौके पर जेसीबी मशीन से खानापूर्ति कर कागजों में मजदूरों के फर्जी मस्टररोल दर्शाकर भुगतान निकालना सीधे तौर पर वित्तीय धोखाधड़ी और सरकारी धन के गबन का मामला बनता है।

‘सिंचाई विभागीय आदेश नियमावली’ के पैरा 1 व 9 के तहत संबंधित अवर अभियंता को कार्यस्थल पर रहकर खंभे बनवाकर गाद की सही पैमाइश करानी होती है, जबकि इसी नियमावली के पैरा 13 के तहत सहायक अभियंता द्वारा कार्य का न्यूनतम 50 प्रतिशत स्थलीय भौतिक परीक्षण अनिवार्य है।

कार्यस्थल पर तकनीकी निगरानी न रखने और नियमों की अनदेखी करने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 के नियम-3 तथा उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा अनुशासन एवं अपील नियमावली 1999 के नियम-7 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

जांच की मांग
जनपद के आक्रोशित ग्रामीणों व किसानों ने मौके पर चल रही जेसीबी का वीडियो साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कर जिलाधिकारी जालौन तथा सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजा है। ग्रामीणों ने निष्पक्ष तकनीकी टीम से जनपद जालौन की सभी खुदाई गई माइनरों की स्थलीय जांच कराने, मजदूरों के हक पर डाका डालने वाले ठेकेदार को काली सूची में डालने तथा लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

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