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अन्ना आंदोलन की तरह कॉकरोच आंदोलन भी धुआं-धुआं हो जाएगा?

डॉ सुयश नारायण
Dr. Suyash Narayan Mishra

लखनऊ  2011 में रालेगण से उठी एक चिंगारी ने दिल्ली की सत्ता का सिंहासन हिला दिया। संसद झुकी, सरकार डगमगाई, देश सड़क पर आ गया। फिर क्या हुआ? उसी अन्ना के कंधे पर चढ़कर कई चेहरे मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गए। कुछ राजभवन के मेहमान बन गए। सत्ता मिली, पर सिस्टम? वो वहीं का वहीं रह गया और अन्ना? जिसने दिल्ली को झुकाया था, वो आज फिर रालेगण की उसी पगडंडी पर अकेला खड़ा है। हाथ में न जनलोकपाल आया, न व्यवस्था बदली।

2026 में इतिहास खुद को दोहरा रहा है। बस किरदार बदले हैं, स्क्रिप्ट वही है। रामलीला मैदान की जगह अब इंस्टाग्राम की रील है। मंच की जगह मीम है। अनशन की जगह हैशटैग है और अन्ना की जगह खड़ा है एक नया नाम कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)। सवाल 15 साल बाद फिर वही है कि क्या ये चिंगारी भी धुआं-धुआं हो जाएगी?

इन 3 वजहों से समझिए कि डर क्यों वाजिब है…

कॉकरोच जनता पार्टी  का कोई जमीनी आधार नहीं

अन्ना के पास कम से कम गांव-गांव से लोग आए थे। जन समूह उनके साथ था। CJP के पास सिर्फ स्क्रीन पर अंगूठा चलाने वाली फौज है। ये गुस्साए हुए बेरोजगार हैं। ब्लॉक लेवल पर एक भी कार्यकर्ता नहीं। इनके पास बेरोजगारी का गुस्सा है, रोजगार का कोई रोडमैप नहीं है।

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अन्ना ने ‘मैं अन्ना हूं’ कहकर गर्व जगाया था। ये खुद को ‘आलसी, बेरोजगार, कॉकरोच’ कह रहे हैं। विक्टिमहुड से क्रांति नहीं आती। शिकायत से सरकार नहीं बदलती।अन्ना के बाद केजरीवाल आए। CJP के बाद कौन? कुछ नेता इस आंदोलन को समर्थन दे रहे हैं। यानी फिर वही पुराने चेहरे नए मीम के साथ। जनता पूछेगी – तुम्हारा विकल्प क्या है?

3 वजह जो कहती हैं – नहीं, इस बार  नेपाल की तरह आग लगेगी 

अन्ना को रामलीला भरने में महीने लगे थे। CJP हर रोज लाखों फॉलोअर्स जोड़ रही है। इस समय CJP के 11M से ज्यादा फॉलोअर हैं जो BJP से कहीं ज्यादा हैं। इसके समर्थकों का मानना है कि ये बड़े आंदोलन की शुरुवात है। कुछ तो नेपाल की तरह सत्ता परिवर्तन के सोने देख रहे हैं। लेकिन ये समझना होगा कि नेपाल के युवाओं के पास ध्येय था, सोशल मीडिया के साथ ग्राउंड पर जन समूह था। वहीं सीजेपी सिर्फ सोशल क्रांति है।

Gen-Z इंतजार नहीं करता, हारने को कुछ नहीं

2011 वाला मिडिल क्लास अन्ना से प्रभावित था, भ्रष्टाचार से कुंठित भी। 2026 का युवा पहले से बेरोजगार है। उसके पास खोने को नौकरी नहीं, पाने को पूरा सिस्टम है।

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BJP ने इसे पाकिस्तान कनेक्शन बताया। यानी चोट सही जगह लगी है। सत्ता वहीं हमला करती है जहां खतरा दिखता है।

अन्ना आंदोलन क्यों धुआं धुआं हुआ?

अन्ना आंदोलन इसलिए धुआं धुआं हुआ क्योंकि दिल्ली जीतकर वो गांव हार गया। लोकपाल कानून बन गया, पर पटवारी की रिश्वत बंद नहीं हुई। चिंगारी ऊपर तक गई, पर जमीन तक नहीं उतरी। CJP का इम्तहान भी वही है। अगर ये सिर्फ ‘वॉयस ऑफ अनएम्प्लॉयड’ बनकर रह गया, सिर्फ मीम, सिर्फ भड़ास, सिर्फ हैशटैग, तो 6 महीने में ये मीम भी पुराना हो जाएगा और सोशल मीडिया का एल्गोरिद्म नया ट्रेंड पकड़ लेगा। पर अगर इसने खेल बदल दिया तो जंगल की आग बन जाएगा। अन्ना के पास TV था। इनके पास एल्गोरिदम है। TV को स्विच ऑफ किया जा सकता है। एल्गोरिदम को रोकना मुश्किल है। अन्ना के पास नैतिक ताकत थी। इनके पास बेरोजगारी की बेबसी है। नैतिकता थक जाती है। बेबसी तब तक लड़ती है जब तक रोटी न मिल जाए। अन्ना ने सिस्टम से आंदोलन करके मांग की थी कि ‘जनलोकपाल दे दो’।

ये सिस्टम से भीख नहीं मांगेंगे। ये TVK की तरह खुद सिस्टम बन जाएंगे। धुआं बनना है या आग – ये CJP को अगले 90 दिन में तय करना है। वरना 2011 और 2026 की तारीखें बदल जाएंगी, नतीजा वही रहेगा।

कॉकरोच जनता पार्टी के सामने भी यही सवाल है, मीम बनना है या मिशन? धुआं-धुआं होना है या दुनिया हिलानी है लेकिन समझना होगा कि फैसला जमीन पर होगा, स्क्रीन पर नहीं।

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