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कुणाल शुक्ला हत्याकांड: बन्थरा पुलिस  सवालों के घेरे में

 लखनऊ। (स्थानीय संवाददाता ) राजधानी की ग्रामीण कोतवाली बन्थरा अक्सर अपने कार्यों को लेकर चर्चा में रहती है। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने न केवल स्थानीय ग्रामीणों को चौंकाया बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए।पिछले महीने की घटना में मृतक महिला के नाम पर एफआईआर दर्ज कर दी गई थी, जो स्वयं में पुलिस की लापरवाही और संवेदनहीनता का उदाहरण बनी। वहीं, अपराधियों से कथित नजदीकियों की कहानियाँ भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

पुलिस और ‘स्वास्तिक एसोसिएट’ का रिश्ता

ग्रामीण सूत्रों का कहना है कि स्वास्तिक एसोसिएट नामक प्रॉपर्टी डीलर ऑफिस, बन्थरा पुलिस के लिए मानो दूसरा थाना बन चुका था। त्योहारों पर पुलिसकर्मी यहां लाइन लगाकर मिठाई और महंगी शराब की बोतलों का उपहार लेते देखे जाते थे। यही नहीं, रात्रि भोज का आनंद लेने के बाद कई पुलिसकर्मी रातभर वहीं रुकते भी थे। एक विशेष सूत्र ने हमें कुछ तस्वीरें भेजी हैं जिनकी है पुष्टि नहीं करते लेकिन इसकी जांच जरूर होनी चाहिए।

कुणाल शुक्ला हत्याकांड और पुलिस पर आरोप

कुणाल शुक्ला हत्याकांड के बाद यह सवाल और गहरे हो गए हैं कि क्या पुलिस की कथित मिलीभगत ने इस अपराध को जन्म दिया। ग्रामीणों की चर्चाओं में यह भी सामने आया है कि घटना के बाद मृतक का मोबाइल और DVR बरामदगी की कहानी भी संदेहास्पद लगती है।

खाकी पर सवाल

स्थानीय लोग कहते हैं कि बन्थरा क्षेत्र में पुलिस और अपराधियों का गठजोड़ कोई नई बात नहीं है। यदि कोई नागरिक पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाता है, तो उसे फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती है। यही कारण है कि लोग अब खुलेआम कहने लगे हैं—“कहीं खाकी ही खाकी को तो नहीं बचा रही?

(यह तस्वीरें हमारे विश्वस सूत्रों द्वारा भेजी गई हैं समग्र चेतना इसकी पुष्टि नहीं करता। यदि इस पर जांच होगी तो स्पष्ट हो जाएगा)

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