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खाली पड़े आम के बागानों में हल्दी, अदरख, जिमीकंद और फर्न की खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

लखनऊ: गाय ग्रामीण संसाधन और आधुनिक तकनीक आधारित स्वरोजगारों को एकल खिड़की के माध्यम से सेवाएं देने के लिए रूरल हब ने न्यू सरस्वती सीएससी एकेडमी, मलिहाबाद में बैठक की, जिसमें स्टार्टअप के संस्थापक गौरव कुमार गुप्ता ने बताया कि रूरल हब का उदेश्य गांव स्तर पर स्वरोजगार बढ़ाने, जैविक खेती और बागवानी को बढ़ावा देने हेतु एकीकृत खेती, लघु एवं कुटीर उद्योगों को सोलर एनर्जी से संचालित कराने, टिश्यू कल्चर जैसी आधुनिक तकनीक से लुप्तप्राय प्रजाति की पौध तैयार करने का कार्य करती है, जिससे गाँव में स्वरोजगार बढ़ेगा, फसलों की लागत मूल्य कम होगी और किसानों की आमदनी बढ़ेगी।  इस स्टार्टअप से गांव स्तर और ब्लॉक स्तर पर लोग जुड़ रहे है, जो स्टार्टअप योजना सहित केंद्र व राज्य की कई योजनाओं का लाभ भी ले रहे है।
<span;>मलिहाबाद<span;> क्षेत्र के आम बागों में अदरख, फर्न, जिमीकंद, हल्दी और कालीमिर्च की खेती के माध्यम से खाली पड़े संसाधनों का उपयोग कर आमदनी बढ़ाने, जैविक उर्वरकों का निर्माण और उत्पादों का जैविक प्रमाणीकरण का कार्य किया जा सकता हैं, इस कार्यक्रम में उद्यान विभाग से जय प्रकाश राजपूत ने बताया कि विभाग की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उन्नयन योजना से हल्दी की प्रोसेसिंग के लिए उद्योग लगा सकते है, जिसमें सरकार 35% कैपिटल पर और 6% ब्याज पर सब्सिडी का लाभ ले सकते है। इसके लिए वह इसी केंद्र पर आकर जानकारी और आवेदन करा सकते है।कार्यक्रम में लखनऊ से वैज्ञानिक हरीश द्विवेदी और स्किल डेवलपमेंट के लिए कार्य कर रहे अजय सिंह ने किसानों और उद्यमियों को स्वरोजगार के लाभ बताये। गौ आधारित प्राकृतिक बागवानी कर रहे गिरिजा शंकर मौर्य ने किसानों की आमदनी बढ़ाने के टिप्स दिये और किसानों को अपने मॉडल पर देखने, समझने का निमंत्रण दिया। कार्यक्रम में मनोज कुमार, लोकेश, गजेंद्र सिंह सहित ग्राम प्रधानों ने सहभागिता की।

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