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पूर्व न्यायाधीश चन्द्र भूषण पाण्डेय द्वारा लिखित ‘75 साल: बदलते भारत की कहानी’ नामक पुस्तक का हुआ विमोचन

लखनऊ: शनिवार को होटल क्लार्क अवध में पूर्व न्यायाधीश चन्द्र भूषण पाण्डेय की पुस्तक ‘75 साल: बदलते भारत की कहानी’ के लोकार्पण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस पुस्तक का विमोचन न्यायमूर्ति एससी वर्मा, न्यायमूर्ति सुधीर कुमार सक्सेना एवं न्यायमूर्ति खेमकरन के कर कमलों द्वारा किया गया।
‘75 साल: बदलते भारत की कहानी’ पुस्तक के लेखक व पूर्व न्यायाधीश चन्द्र भूषण पाण्डेय ने प्रेस वार्ता में मौजूद पत्रकारों व अतिथिगणों को संबोधित करते हुए कहा कि ‘ये किताब आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखकर लिखी गई है। ऐसा करने की खास वजह यह है कि जब तक हम आने वाली पीढ़ी को 75 साल में भारत में हुए बदलावों से अवगत नहीं कराएंगे तो वह अपनी जिम्मेदारी का निर्वाहन कैसे कर पाएंगे। हमारी पीढ़ी जो 75 साल में भारत में हुए बदलावों की साक्षी रही है, उसकी जिम्मेदारी बनती है कि देश के युवाओं को भारत में हुए सभी छोटे-बड़े बदलावों की सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराए।
उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश की आने वाली पीढियां इस बात को समझ कर आगामी 75 साल में भारत को बेहतर भारत बनाए व देश का भविष्य उज्जवल करें। साथ ही संविधान के बड़े-बड़े आदर्शों पर खरे उतरे। इस किताब में लिखे सैकड़ों सवालों में से एक अहम सवाल जो हर तरफ चर्चा में है वो है हिन्दू राष्ट्र का मुद्दा। हमारे युवाओं को हिन्दू राष्ट्र के नाम पर भ्रमित किया जा रहा है। लेकिन हिन्दू राष्ट्र के मायने नहीं बताए जा रहे हैं। इस किताब में ऐसे कई भ्रमों को तोड़ा गया है, जिनको आधार बनाकर आने वाली पीढ़ियों को गुमराह किया जा रहा है।
पुस्तक के लेखक ने कहा कि देश की आजादी को अक्षुण्ण रखने के लिए जो भी करना पड़ेगा, वो करेंगे। किसी देश को सुचारू ढ़ंग से चलाने के लिए दो बार से ज्यादा कोई भी पार्टी सत्ता में नहीं चाहिए, बदलाव प्रकृति का नियम है। इस किताब में एक और अहम मुद्दे पर चर्चा हुई है, कांग्रेस मुक्त भारत या सोनिया परिवार मुक्त कांग्रेस ये एक बड़ा सवाल है। कांग्रेस पार्टी स्वतंत्रता सेनानियों की पार्टी है, लेकिन देश सोनिया परिवार मुक्त कांग्रेस चाहता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि व विधानसभा प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने रविन्द्रनाथ टैगोर जी की कविता ‘Where the is mind without fear’ का जिक्र करते हुए कहा कि आज आजादी के इतने सालों बाद पूर्व न्यायाधीश चन्द्र भूषण पाण्डेय की किताब ‘75 साल: बदलते भारत की कहानी’ रविन्द्रनाथ जी की कविता को सार्थक करती है। उन्होंने लेखक की निर्भीकता की सराहना करते हुए कहा कि जिंदादिली हमारे अवध की पहचान है, और चन्द्र भूषण पाण्डेय निर्भीक तो है लेकिन निरंकुश नहीं, उनकी यही बात उन्हें दूसरों से अलग बनाती है।
न्यायमूर्ति एस सी वर्मा ने कहा कि पूर्व न्यायाधीश चन्द्र भूषण पाण्डेय के द्वारा लिखी गई ये किताब समाज के लिए एक ‘eye opener’ है। इस पुस्तक को पढ़ने वाले इसे जीवन पर्यन्त याद रखेंगे और इसका अनुसरण भी करेंगे। हमारी आने वाली पीढियां भी इस किताब से बहुत प्रभावित होंगी।
न्यायमूर्ति सुधीर कुमार सक्सेना ने पुस्तक के लेखक व पूर्व न्यायाधीश चन्द्र भूषण पाण्डेय के व्यक्तित्व की सराहना इन दो पंक्तियों के मध्यमा से की-जब से मैं चला हूं मेरी मंजिल पर नजर है, मुड़कर कहीं मील का पत्थर नहीं देखा।
न्यायमूर्ति खेमकरन ने कहा कि ‘75 साल: बदलते भारत की कहानी’ जो सामूहिक होने के साथ-साथ सामाजिक किताब भी है। किताब का लेखन कोई आसान काम नहीं है, वो भी इतने धैर्य, साहस और निर्भीकता से लिखना बहुत बड़ी बात है। पुस्तक में भारत की जीवंत तस्वीर का जिक्र होने के साथ-साथ बहुत सी बातों का जिक्र है, संक्षेप में इतना ही कहूंगा कि ऐसी पुस्तक का विमोचन करना मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है।
इस कार्यक्रम के एंकर मशहूर हास्य कवि सर्वेश अस्थाना के साथ आयोजक राजेश जायसवाल ने सभी अतिथिगणों को धन्यवाद दिया। इस पुस्तक के विमोचन के खास अवसर पर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रंगनाथ पाण्डेय, सेवानिवृत सचिव जय शंकर मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार आनंद वर्धन सिंह, वरिष्ठ पत्रकार रामेश्वर पाण्डेय, वरिष्ठ पत्रकार कमाल खान, वरिष्ठ पत्रकार शरद प्रधान, गोविन्द पंथ, वरिष्ठ पत्रकार वाशेन्द्र मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार अतुल चन्द्र आदि समेत मीडिया जगत की तमाम मशहूर हस्तियां मौजूद रहीं।

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